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राज्यसभा में सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण की धज्जियां उड़ा दी गई...

नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार द्वारा सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण के लिए संविधान संशोधन बिल मंगलवार को लोकसभा से पास करा लिया गया है, जिसके बाद बुधवार को राज्यसभा में इस बिल पर चर्चा हो रही है। गौरतलब हो को लोकसभा में करीब पांच घंटे की बहस के बाद बिल पास करा लिया गया था, लेकिन राज्यसभा में बुधवार देश शाम तक चली चर्चा के बाद भी बिल पास नहीं हो सका है।

वहीं बिल पर चर्चा के दौरान आरजेडी सदस्य प्रो मनोज कुमार झा ने कहा कि सरकार जातिगत जनगणना के आंकड़ों को क्यों सामने आने नहीं दे रही है। सरकार एंटी बैकवर्ड, एंटी दलित है, इसमें कोई संदेह नहीं है। उन्होने सदन में झुनझुना दिखाते हुए कहा कि, ये बिल ऐसा झुनझुना है जो दिखता तो है लेकिन बजता नहीं है।

वहीं बिल पर चर्चा के दौरान वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि, 5 साल सरकार के पास थे तब ये बिल लेकर नहीं आए। उन्होंने कहा कि, पहले बिल आता, उस पर पूरी चर्चा हो जाती, बिल सेलेक्ट कमिटी के पास जाता, लेकिन अब बिल लेकर आए हैं, जल्दबाजी में इसे पास कराने की कोशिश सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा कि, बिना किसी डेटा, रिपोर्ट के संविधान में इतना बड़ा संशोधन लाने की बात गलत है।

उन्होंने कहा कि, दलित का परिवार जो 5000, 10,000 रुपये कमाता है वो गरीब नहीं है बल्कि जो साल में 8 लाख रुपये कमाता है वो गरीब है? क्या सरकार इस आरक्षण बिल के जरिए वास्तविक वंचितों को फायदा पहुंचा पाएगी? उन्होंने कहा कि, मोदी सरकार में हर साल सिर्फ 45 हजार लोगों को नौकरियां मिली हैं, जब नौकरियां हैं ही नहीं तो 10 फीसदी आरक्षण का फायदा किसे मिलेगा?

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उन्होंने कहा कि, सदन में टॉयलेट बनाने के आंकड़ों पर चर्चा क्यों की गई? जितनी नई नौकरियां मिली हैं उससे कई गुना ज्यादा नौकरियां छीन ली गई हैं। उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक आधार पर आरक्षण को असंवैधानिक कहा है तो इस बारे में फैसला क्यों लिया गया? एससी, एसटी, ओबीसी के तहत जिन गरीबों को नौकरी नहीं मिली उनका क्या होगा?

साथ ही उन्होंने केंद्र की सत्ताधारी मोदी सरकार पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि, सरकार के इस कदम का हश्र भी नोटबंदी जैसा होगा। ये एक जुमला से ज्यादा कुछ नहीं होगा। ये 'कमल का हमला और एक और जुमला' साबित होगा। वहीं दूसरी तरफ सरकार इसे ऐतिहासित बदलाव करार दे रही है।

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