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कलाम सिर्फ एक नाम नहीं एक दिशा है, पढ़े पूरी कहानी

सत्यम दूबे

नोएडा : महान वैज्ञानिक तथा मिसाइल मैन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम का भारत हमेंशा ऋणि रहेगा। कलाम के जीवन में जो स्वाभिमान था, वो शायद ही किसी के जीवन में रहा हो। जिस कारण वे आज के युवा के आदर्श बने हुए है। आपको बता दें कि कलाम का जन्म 15 अक्टुबर सन 1931 को एक मछुआरे परिवार में हुआ था । इनके पिता अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन मछुआरे का काम करते थे।

कलाम का शुरूआती जीवन बेहद ही संघर्षपूर्ण था लेकिन उनकी दिनचर्या बहुत ही संतुलित थी। वे आठ साल की उम्र से ही सुबह चार बजे उठ जाते थे और सीधे गणित का विषय पढ़ने जाया करते थे। क्योंकि गणित उन्हें बेहद प्रिय था। उनके इस आदत से कलाम के अध्यापक हर साल पांच बच्चों को मुफ्त में गणित पढ़ाया करते थे। लेकिन इसके साथ उनकी एक अनोखी शर्त भी थी कि जो बच्चे नहाकर आएंगे वो सिर्फ उन्हें ही पढ़ाएंगे। इसलिए कलाम जी नहाकर ही ट्यूशन पढ़ने जाया करते थे। ट्यूशन से आने के बाद नमाज पढ़ते थे। उसके बाद आठ बजे तक नामेश्वरम रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर न्यूज पेपर बांटने निकल जाया करते थे ।

आपको बताते हैं इनके जीवन से जुड़ी वो खास कहानी जिससे कलाम को बैज्ञानिक बनने की प्रेरणा मिली। इसकी वजह पांचवी कक्षा के टीचर सुब्रह्मण्यम अय्यक हैं, जो कलाम के अच्छे टीचरो में से एक थे। एक बार क्लास के दौरान अय्यक ने बच्चों से पूछा था कि चिड़िया कैसे उड़ती है ? क्लास का कोई भी बच्चा इसका उत्तर नहीं दे पाया । जिसके कारण अगले दिन बच्चों के समुद्र के किनारे ले गये, वहां कई पक्षी उड़ रहे थे। कई समुद्र के किनारे बैठे थे । जहां उन्होने सभी बच्चों को पक्षियो के उड़ने का कारण समझाया, साथ ही पक्षियो के शरीर के बनावट और उनके विस्तार को समझाया।

इस घटना ने कलाम के जिंदगी को एक नया लक्ष्य दिया। उन्होंने तय किया कि अब उनको उड़ान की दिशा में ही कैरियर बनाना है । इसके बाद कलाम ने भौतिक विज्ञान से एमआइटी की पढ़ाई सन 1954-57 में मद्रास इंजीनियरिंग कालेज से पूरी की ।

इसके बाद इनके जीवन का अनमोल समय शुरु होता है सन 1958 से, जब वे डीटीडी एंड पी एयर में बतौर वरिष्ठ सहायक वैज्ञानिक नियुक्त हुए और इसी साल अनुसंधान और विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ) में वरिष्ठ सहायक वैज्ञानिक नियुक्त हुए। इनके नेतृत्व में प्रोटोटाइप होवर क्राफ्ट का विकास हुआ ।

1962 में वे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन छोड़कर अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े। जिस दौरान कलाम 1963 से लेकर 1982 तक विभिन्न पदो पर कार्यरत रहे। इसके बाद एयरोडायनमिक्स से जुड़े फिर कलाम थुम्बा की सेटेलाइट प्रक्षेपण यान टीम के सदस्य बनें, वे जल्द ही एस.एल.वी के भी निदेशक बना दिये गये। सन 1980 में सफलतापूर्वक रोहिणी सेटेलाइट का प्रक्षेपण किया गया जिसका श्रेय कलाम को ही जाता है। कलाम को सन् 1981 में पद्मभूषण और 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। बाद में वे 25 जुलाई 2002 को भारत के राष्ट्रपति चुने गये।  राष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे फिर पढ़ाई के क्षेत्र में आ गये। 27 जुलाई 2015 को मेघालय के सिलांग में कलाम लेक्चर देने गये थे और वहीं उन्हे दिल का दौरा पड़ा जिससे उनका निधन हो गया । उनके चले जाने से भारतीय वैज्ञानिक जगत को एक गहरा आघात पहुंचा।

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