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सप्ताह भर में हजारों मौत मरी 8 साल की मासूम

नमस्कार...आज खबर की शुरुआत, बेहद ही गमगीन खबर के साथ करनी पड़ रही है। जिसमें आप अपराधियों के सामने दम तोड़ती सिस्टम ले लेकर रक्षक बने भक्षक और समाज की संकुचित मानसिकता समेत और शैतानी ताकतों के समाजभेदी रवैये से परिचत होगें...सुन  सकेंगे तो सुनिए...रोंगटे खड़े हो जाएंगे...ये कहानी है... अंधा कानून की है, ये कहानी है कानून के लंबे हाथ के बैने पड़ने की है... सुनकर थोड़ा फीलमी फील होता है...लेकिन असल में काफी दर्दनाक है...घर या पड़ोस में कोई मासूम है तो उसके साथ  बैठिए, उसका हाथ अपने हाथ में थामिए...तब शायद आप समझ सकेंगे...आखिर समाज में कहां और कैसे ‘शॉट सर्किट’ हो रहा है?

आम तौर पर पठानकोट के सेशंस कोर्ट में ऐसा नजारा नहीं दिखता। लेकिन 10 जून 2019 को यहां एक ऐसे मामले की सुनवाई होनी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर से पंजाब ट्रासफर किया है। मामले की गंभीरता का अंदाजा ऐसा लगा सकते हैं कि कोर्ट के 500 मीटर के दायरे में सुरक्षाबलों का जबरदस्त पहरा है...परिंदा भी पर नहीं मार सकता...पत्रकारों को भी 500 मीटर के दायरे से बाहर रखा गया...इक्का दुक्का काली कोर्ट में कानून का रखवाला या केस से जुड़े चंद लोगों को ही कोर्ट में प्रवेश करने की अनुमति थी। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट के जज भी लाइव स्ट्रिमिंग के जरिए कोर्ट की सुनवाई टीवी पर देख रहे थे...

भरी दोपहरी में लहलाती धुप के बीच कोर्ट का फैसाल आया, जम्मू-कश्मीर के बहुचर्चित कठुआ कांड में करीब 17 महीने बाद, 100 से अधिक सुनवाईओं में सौकड़ों गवाहों के बयानात और सबूतों के आधार पर पठानकोट की अदालत इस नतीजे पर पंहुची की सात में से छह मुल्जिमों को मुजरीम करार दिया जाता है...सजा के ऐलान से पहले कोर्ट ने भी कुछ घंटे का ब्रेक लिया और ढलती दोपहरी में छह में से तीन मुजरीमों की बची हुई पूरी उम्र कैद कर ली, जबकि तीन अन्य को 5-5 साल के लिए जेल में ढकेल दिया।

कई लोगों के साथ देश विरोधी नारे लगा चुकी जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबुबा मुक्ती सजा से संतुष्ट दिख रही है...लेकिन 8 साल की मासूम आसिफा की अम्मी कोर्ट के फैसले से नाराज हैं...वह फांसी की मांग कर रही थी, लेकिन सबुतों और गवांहों के आधार पर न्याय करने वाली देवी ने दुष्टों को उम्र कैद ही दिया। लेकिन बुढ़ापे का सहारा खोने वाली मां अपनी जिद्द पर अड़ी है...उम्मीद की डोर बरकरार है, कानून के छलावे के बाद भी न्याय की आस है, इसलिए दोषियों को फांसी के तखते तक लाने के लिए उपरी अदालत में जाने की बात कर रही है।

लेकिन इससे पहले कि आप किसी नतीजे पर पहुंचे, यह जानना जरूरी है कि आखिर ये कठुआ कांड है क्या? कम शब्दों में कहें तो यह पहले से अशांत जम्मू-कश्मीर में नई आग सुलगाने जैसा है...जिसकी भेंट एक 8 साल की मासून आसिफा चढ़ी है।

इस दर्दनाक कहानी की शुरुआत कुछ ऐसी है कि...हर रोज की तरह 10 जनवरी 2018 को भी आसिफा अपने घोड़ों के साथ जंगल में थी। भला उसके क्या पता था कि आज उसके साथ क्या होने वाला है? लेकिन इससे पहले ये जानिए की इस पूरी वारदात की प्लानिंग 4 जनवरी 2018  को मुख्य मुजरीम सांजी राम ने ही की थी।

दरअसल, एक मंदिर का सेवादार संझी अपने क्षेत्र में बढ़ रहे बकरवाल समुदाय को वहां से हटाने के लिए एक योजना बना रहा था। जिसमें उसे दीपक खजुरिया नाम के एक सरकारी अधिकारी को भी शामिल किया। पहले से तैयार योजना के तहत संझी राम ने खजुरिया और प्रवेश कुमार के साथ अपने अपने भतीजे को भी शामिल किया और बच्ची को अगवा करने की जिम्मेदारी संझी राम ने अपने भतीजे को दी।

अपहरण से पहले 7 जनवरी 2018 को दीपक खजुरिया अपने दोस्त विक्रम के साथ नशे की गोलियां खरीदी। तो इधर  8 जनवरी 2018 को नाबालिग आरोपी ने अपनी योजना की जानकारी एक दोस्त को दी और वो भी उसके साथ हो लिया। 10 जनवरी 2018 को साजिश के तहत संझी के भतीजे ने जंगल में घोड़ा चरा रही आशिफा को घोड़ा ढूंढने में मदद का भरोसा दिलाया और उसे घने जंगल की ओर ले गया। हालांकि बच्ची भागने के रास्ते तलाश रही थी...

लेकिन कमजोरप पड़ी आसिफा जल्द ही दबोच ली जाती है, और उसके रगो में नशे की दौड़ने लगती है। उसे एक देवी स्थान पर ले जाया गया, जहां पहली बार उसके साथ बेहोशी की हालत में रेप हुआ...और इसी के साथ आशिफा पर जुल्म का कहर बरपने लगा... मंदिर का पुजारी संझी राम, परवेश कुमार और दीपक खजुरिया ने सप्ताह भर के अंदर 8 साल की बच्ची को हजरों मौत दी, दरिंदों ने बच्ची का जिस्म नोच खाया, कभी होश में लाकर तो कभी बेहोशी की हालत में मासूम आसिफा की मासूमित कई बार तार-तार हुई।

दिल दहला देने वाले इस अपराध के अपराधियों में मुख्य आरोपी से मुजरीम बने सांजी राम को आरपीसी की धारा 302 (हत्या के लिए), 376 (रेप के लिए) और 120 बी (साजिश के लिए) के तहत दोषी करार देते हुए पूरी उम्रकैद कैद कर ली है। जबकि दूसरे मुजरीम परवेश कुमार को भी समान्य धाराओं में दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई गई है, वहीं विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया को आरपीसी की धार 120 बी, 302, 363, 201, 343, 34, 376D, के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा दी गई है।

बता दें कि खजुरिया वहीं आधिकारी हैं जो बच्ची की हत्या की प्लानिंग बदलने का आदेश दिया था, ताकि वह बच्ची की मौत से पहले एक बार उसके साथ बलात्कार कर सके, उसे मौत से पहले एक और मैत दे सके। औक और बार बच्ची का जिस्म नोच सके।

आपको बता दें कि अंतिम बार आसिफा को नशे की हालत में एक पुलिया के पास ले जाया गया, जहां खजुरिया ने उसके साथ रेप किया और फिर अन्य आरोपियों ने तील-तील मर रहे मासूम का गला घोटकर उसकी हत्या कर जंगल में फेंक दिया, पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे पर पत्थर मारा...

लेकिन अपने पाप पर पर्दा डाल अपराधी अगले मंसूबे पर बढ़ते इससे पहले ही 10 जनवरी को लापता हुई आसिफा के परिजन पुलिस के पास पहुंचे और गुमशुदा बेटी की रिपोर्ट दर्ज कराई...अब इसे दुर्वाभ्य समझें या साजिश कि इस पूरे मामले की जांच टीम में मुख्य आरोपियों में से एक खजुरिया भी शामिल था। उसने कई बार बच्ची का रेप किया और मामले पर पर्दा डालने के एवज में मुख्य आरोपी संझी राम से करीब 1.5 लाख रुपये भी लिए...

खजुरिया ने अपने इस पाप में तीन अन्य पुलिस कर्मी आनंद दत्ता, सुरेंदर वर्मा, और तिलक राज को भी शामिल किया, जिन्हें साबूतों के साथ छेड़छाड़ कर आरोपियों को बचाने के मामले में दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल जेल की सजा सुनाई गई है, इसके अलावा दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है। जबकि सातवें आरोपी सांजीराम के बेटे विशाल को कोर्ट ने सबूतों के आभाव में बरी कर दिया...

अब आप खुद तय करें कि आसिफा की असमत लूटने वाले हैवानों को लिए कौन सी सजा प्रायाप्त होगी...? अगर अपनी बिटिया के सिर और अपने दिल पर हाथ रख कर जवाब देना है... तो क्या कहंगे?

लेकिन देश का एक तबका ऐसा भी है जो बच्ची के साथ बरबर्ता करने वाले दरिंदों के साथ कल भी खड़ी थी, आज भी खड़ी है और आगे भी खड़े रहने की बात कर रही है। अपने आपको कानून का पैरोकार बताने वाले वकीलों का ये झूंठ अपराधियों का हैसला बुलंद कर रहा है, अपराधियों को बचाने के लिए कानून की कमजोर कड़िया तलाशने के साथ-साथ विरोध प्रदर्श भी हुए। हालात ऐसे कि जम्मू-कश्मीर की अदालत में इसकी सुनवाई ही संभव नहीं, जिसके बाद परिजनों की मांग पर सुप्रीम कोर्ट को मामले की सुनवाई पठानकोट की सेशंस कोर्ट में मुकर्रर करनी पड़ी। लेकन फिर भी कोर्ट का फैसला इतना कठोर नहीं रहा जिससे अपनी बेटे खोने वाली मां का कलेजा ठंडा पड़ सके।

ऐस में आप खुद सोचिए कि व्यवस्था कितनी खोलखली हो चुकी है..जिसके हाथ में कानून की कमान है वहीं रेप जैसे संगीन अपराध में लिप्त है, मंदिर का पूजारी देवी की पूजा के तुंरत बाद मासूम का बलात्कार करता है और हैरानी की बात है कि हम भी उसी समाज का हिस्सा हैं जिसका हिस्सा कल ये दरिंदे भी थे, इतने से भी बात नहीं बनी तो फांसी के हकदार इन दरिंदों के समर्थन में भी कुछ लोग झंडे बुलंद करते हैं, जाति-धर्म की नबज टटोली जाती है...इसे विडंवना नहीं तो क्या कहेंगे? मुझे तो कहते हुए शर्म आ रही है, आपका पता नही...क्या हाल हुआ होगा...

लेकिन इस बात को भी गांठ बंध लेनी होगी कि जब हम और आप अपने दिल में इंसानियत को जगह नहीं देंगे तब तक दुनिया से उम्मीद करना भी महज बेवफाई के सिलवाय और कुछ नहीं...हम बलदें, आप बदलिए, वो बदेगा और जमाना अपने आप बदल जाएगा।

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