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महीने भर में सियासत का 5वां सूरज अस्त, अब जेटली भी चल बसे...जानिए खास बातें

नई दिल्ली: पहले शिला दिक्षीत, फिर सुषमा स्वराज, फिर जगननाथ मिश्र, फिर बाबू लाल गौर और अब अरुण जेटली....महीने भर के अंदर ये सब दुनिया से चले बसे और पीछे छोड़ गए अपनी यादें। ये वो नाम हैं जिनकी सांसे महीने भर के भीतर थम गई। चंद रोज के भीतर देश ने पांच सियासी दिग्गज खो दिए, जिनके जाने की खबर मिलते ही पूरा देश मातम में डूब गया।

मौत से कौन डरता है, मौत से सबकी यारी है, आज तेरी तो कल मेरी बारी है...मौत तो जीवन का सच है, जिससे आज जेटली का सामना हुआ है, कल किसी और का हुआ था कल किसी और को होगा। लेकिन जैसे जेटली गए भला ऐसे भी कोई जाता है क्या?  कहते हैं निधन से चंद घंटे पहले अरुण जेटली से मिलने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन एम्स पहुंचे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था ये अंतिम मुलाकात है। जेटली का निधन भारत और खास कर भाजपा के लिए कितना दुखद है इसका अंदाजा ऐसे लगाइए कि जेलटी की निधन की खबर मिलते ही गृह मंत्री अमित शाह हैदराबाद से वापस लौट गए। इतना ही नहीं विदेश दौरे पर गए पीएम मोदी भी भारता लौटना चाहते थे। लेकिन फोन पर हुई बात के बाद जेटली के परिजनों से पीएम को ऐसा करने से मना कर दिया।

अब जरा ये समझिए कि जेटली जिंदगी से किस कदर परेशाना थे...

इसी साल मई महीने में जेटली ने किडनी ट्रांसप्लांट कराया था

कैंसर का इलाज कराने अमेरिका भी गए थे।

सांस लेने में परेशानी की शिकायत मिलने के बाद 9 अगस्त को एम्स में भर्ती कराया गया था।

कई दिनों से सेहत में उतार-चढ़ाव की खबरें आ रही थी, लेकिन बीते कुछ रोज से जेटली क्रिटिकल कंडिसन में थे।

वेटिंलेटर पर चल रहे जेटली से मेल मुलाकाता करने वालों में महामाहिम और प्रधान सेवक समेत विपक्ष के कई नेता भी शामिल थे।

एम्स में वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम जेटली की सेहस सुधारने में जुटी थी, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

वहीं तब सभी के पौरों तले जमीन खिसक गई जब, एम्स ने एक बयान जारी कर कहा है कि वे बेहद दुख के साथ सूचित कर रहे हैं कि 24 अगस्त को 12 बजकर 7 मिनट पर माननीय सांसद अरुण जेटली अब हमारे बीच में नहीं रहे। जेटली देश के उन नेताओं में शुमार किए जाने हैं जो विरोधी खेमे में भी लोकप्रिय रहे हैं।

आइए देखिए कि जेलटी के निधन से सत्ता और विपक्ष को कितना झटका लगा है...

महामहिम रामनाथ कोविंद ने कहा कि उनका निधन हमारे सार्वजनिक जीवन और हमारे बौद्धिक पारिस्थितिकी तंत्र में एक बहुत बड़ा शून्य है...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा... भाजपा और अरुण जेटली जी का अटूट बंधन था। वह एक छात्र नेता के रूप में, आपातकाल के दौरान हमारे लोकतंत्र की रक्षा करने में सबसे आगे थे...

गृह मंत्री अमीत शाह ने के लिए जेटली का निधन से अत्यंत दुःखी है। जेटली का जाना उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है।

इसके अलावा भी कांग्रेस और अन्य विरोधी दलों के नेताओं ने भी जेटली के निधन पर शोक-संवेदना व्यक्त करते हुए परिजनों को ढांढस बंधावाएं हैं।

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