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कैसे हुई कारगिल दिवस की शुरूआत, जानिए कुछ रोचक तथ्य

सत्यम दूबे

नोएडा : दुश्मन ने सीमा रेखा पर भारत को ललकारा था  ।

भारत माता के वीर सपूतों ने ललकार स्वीकारा था ।।

कूंच किये थे भारत मां के वीर सपूत सीमाओं पर ।

लेकर मां से आशीष चले युद्ध के राहों पर ।।

26 जुलाई के खातिर वीरों ने बलिदान दिया ।

टाइगर हिल पर लहराया तिरंगा, अपने जानों को न्योछावर किया।

हम बात कर रहे है 26 जुलाई 1999 की, भारत मां के रणबांकुरो ने 26 जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर अमर तिरंगा फहराया था । 3 मई 1999 को पांच हजार सैनिकों के साथ पाकिस्तान ने कारगिल की ऊंची पहाड़ियो पर  घुसपैठ किया । दुश्मनों का मंसूबा था, भारत का कनेक्शन सियाचिन और जम्मू-कश्मीर नेशनल हाइवे से काट दिया जाय। इस मंसूबे के साथ दुश्मन ने द्रास और कारगिल की ऊंची पहाड़ियो पर कब्जा करने की कोशिश की । जिसको एक चरवाहे ने देख लिया और नीचे आकर भारतीय जवानो को बताया कि ऊपर पाकिस्तानी सैनिक बंकर बना कर कब्जा किये हुए हैं । भारतीय सेना को जब इस बात की जानकारी मिली तो 5 मई 1999 को  पेट्रोलिंग टीम के कैप्टन सौरभ कालिया की अगुवाई में जानकारी लेने के लिए भारतीय सेना कारगिल पहुंचते है ।

दुश्मन भारतीय सैनिको को पकड़ लेते हैं और पांच सैनिक की हत्या कर देते हैं । 9 मई को दुश्मन की गोली बारी से भारतीय सेना का कारगिल में मौजूद गोला बारुद का स्टोर नष्ट हो जाता है । 10 मई को लद्दाख का प्रवेश द्वार यानि द्रास , काकसार और मुश्कोह सेक्टर में दुश्मन को देखा जाता है । 

जिसके बाद 26 मई को भारतीय वायुसेना को कार्यवाही करने का आदेश दे दिया जाता है । भारतीय वायुसेना ने मिग 21 और मिग 29 के इस्तेमाल से दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था, तो वही थल सेना के अदम्य पराक्रम और साहस ने  दुश्मन के मनोबल को तोड़ दिया ।

आपको बता दें इस युद्ध में भारतीय सैनिको द्वारा बड़ी संख्या में रॉकेट और बम का इस्तेमाल किया गया जिसमें करीब दो लाख पचास हजार गोले दागे गये  तो वहीं पांच हजार बम फायर करने के लिए तीन सौ से ज्यादा मोर्टार, तोपों और रॉकेट लांचरो का इस्तेमाल किया गया । युद्ध कितना कठिन था आपको इसका अंदाजा इससे ही लग जायेगा कि लड़ाई के 17 दिनों में हर रोज प्रति मिनट में एक राउंड फायर किया जाता था । द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यहीं एक ऐसा युद्ध था जिसमें दुश्मन देश की सेना पर इतनी बड़ी संख्या में बमबारी की गयी थी ।

2 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने कारगिल पर तीन तरफ से हमला कर दिया , जिसके फल स्वरुप 4 जुलाई को टाइगर हिल पर पुन: कब्जा कर लिया  गया । इस युद्ध में भारत ने 527 से ज्यादा वीर याद्धाओ को खोया तो वहीं 1300 से ज्यादा सैनिक घायल हुए थे । 14 जुलाई को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने भारत के जीत की घोषणा कर दी । वही 26 जुलाई को विजय दिवस के रुप में मनाये जाने का एलान कर दिया ।

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