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स्पीकर नहीं प्रोटेम स्पीकर बनेंगे बीजेपी के गंगवार, है यह वज़ह

नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव 2019 में प्रचंड जीत के बाद एक बार फिर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लेनेवाले है। जिससे पहले उनके सबसे भरोसेमंद लोगों में गिने जाने वाले संतोष गंगवार को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाएगा। जो नए सांसदों को शपथ दिलाएंगे। भारतीय संसद की परंपरा के अनुसार यह संसद की परंपरा है कि किसी भी वरिष्ठ सांसद को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाए। जिसके नेतृत्व में वे नये सांसद शपथ ग्रहण के साथ एक नये ओहदे के साथ मंत्रिमंडल का हिस्सा बनते है।

आपको बता दें कि संतोष गंगवार 1981 और 1985 लोकसभा चुनाव हार के बाद टूट गये थे, लेकिन उन्होंने अपनी हार नहीं मानी। फिर पुनः 1989 के लोकसभा चुनाव से उन्होंने अपने विजयी अभियान की शुरूआत की। जो तकरीबन 6 लोकसभा चुनावों तक बना रहा। यह आंधी थोड़ी धीमी भी हुई लेकिन एक बार फिर यह आंधी 2014 के चुनाव के दौरान उठ खड़ा हुआ, जो 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बरकरार रहा। इस बार भी उन्होंने उत्तर प्रदेश की बरेली संसदीय सीट पर अपने प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी भगवत शरण को 1,67,282 वोटों से पराजित किया।

आपको बता दें कि इससे पहले 2014 में 16वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव के बाद कांग्रेस सांसद कमलनाथ को लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर यानी अस्थायी अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। तब कमलनाथ लोकसभा के सबसे वरिष्ठ सांसद थे और उन्होंने मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा संसदीय सीट से लगातार नौवीं बार जीत हासिल की थी।

बता दें कि प्रोटेम (Pro-tem) शब्द लैटिन भाषा के शब्द प्रो टैम्‍पोर (Pro Tempore) का संक्षिप्‍त रूप है। जिसका अर्थ - 'कुछ समय के लिए' होता है। गौरतलब है कि प्रोटेम स्‍पीकर यानी अस्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है और इसकी नियुक्ति आमतौर पर तब तक के लिए होती है जब तक लोकसभा या विधानसभा अपना स्‍थायी अध्‍यक्ष (स्पीकर) नहीं चुन लेती।

बता दें कि अस्थायी अध्यक्ष नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलवाता है और शपथ ग्रहण का पूरा कार्यक्रम इन्हीं की देखरेख में होता है। सदन में जब तक सांसद शपथ नहीं ले लेते, तब तक उन्हें सदन का हिस्‍सा माना जाता है। इसलिए सबसे पहले सांसदों को शपथ दिलाई जाती है। जब सांसदों की शपथ हो जाती है तो उसके बाद ये लोग लोकसभा अध्‍यक्ष का चुनाव करते हैं।

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