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BUDGET 2018: आम बजट में दिखा मोदी की करनी और कथनी में अंतर!

नई दिल्ली: गुरुवार को केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल का पूर्ण और आखिरी बजट पेश किया है। बजट में आम नागरिकों और मिडिल क्लास के लिए ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ वाली कहावत को चरितार्थ किया गया है। वहीँ बजट आने के बाद से विपक्ष ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है।

बतादें कि गुरुवार वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2018-2019 का आम बजट पेश किया है। इस बजट से लोगों को काफी उम्मीदें थीं लेकिन सरकार का बजट जन आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका है। राहत की आस लगाए बैठी जनता को कुछ भी हासिल नहीं हुआ। वहीं विपक्ष ने भी बजट पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने सरकार के बजट को लेकर मोदी सरकार पर हमला किया है। चिदंबरम ने कहा, सरकार बिना किसी विचार के चल रही है तभी बजट में एक्सपोर्ट बढ़ाने वाले किसी कदम की चर्चा नहीं हुई। आयात पर अंकुश लगाने के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की बात की गई है।

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दावोस में प्रधानमंत्री ने जिन कदमों की चर्चा की, उसे बजट में इतनी जल्दी भुला दिया गया। कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी की करनी और कथनी में बड़ा अंतर दिखा है इस बजट में, उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में अड़चनें यूं ही जारी रहेंगी। सरकार के मेडिकल के क्षेत्र में की गयी घोषणाएं भी जुमला साबित होंगी। निजी निवेश को बढ़ाने के लिए बजट में कुछ भी नहीं कहा गया। सामान्य करदाताओं के लिए कोई छूट नहीं दी गई। पूर्व वित्तमंत्री अने कहा कि ऐसा लग रहा है मानों सरकार और खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली बजट को लेकर गंभीर नहीं थे।

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बजट देश की जनता के लिए होगा है देश के विकास के लिए होता है, लेकिन मोदी सरकार ने लोगों को निराश कर दिया है। ज्ञात हो कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार का यह आखिरी और पूर्ण बजट है, इसके बाद साल 2019 में आम चुनाव होने हैं। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही थी कि सरकार आम जनता को महंगाई, सहित कई मुद्दों पर बड़ी राहत दे सकती है, लेकिन फौरी तौर पर कुछ ऐसा होता नहीं दिख रहा है।

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