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सत्ता और विपक्ष पर धारा 370 का असर, खिलता कमल और सिकुड़ता विपक्ष!

नोएडा : जम्मू-कश्मीर को धारा 370 से मिली आजादी को पाकिस्तान अपनी गुलामी समझ रहा है, तो भारत में भी कई ऐसे लोग है, जो पाकिस्तानी जुबान बोल रहे है। लेकिन राष्ट्रभावना के सामने उनके लिए अपना कुनबा संभाल पाना भी मुश्किल हो चला है।

करीब सात दशक के जारी इस बड़ी परेशानी को चुटकियों में छु मंतर कर बीजेपी अपनी पीठ थपथपा रही है, तो सदमे आए विरोधी दलों को कुछ समझ नहीं आ रहा। 370 पर जारी बात विवाद के बीच कांग्रेस और सपा समेत अन्य दलों के नेता भी अपना भविष्य कमल की पंखुड़ियों में खोज रहे है।

हाल ही में गांधी परिवार के करीबी रहे संजय सिंह ने राज्यसभा से इस्तीफा देकर पत्नी अनिता के साथ भाजपा का कमल थाम लिया। तो अब पार्टी नेता भुबनेश्वर कलिता भी कांग्रेस से हाथ छुड़ा भगवा रंग में रंग चुके हैं। जबकि इधर समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद संजय सेठ और सुरेंद्र सिंह नागर भी बीजेपी के हो लिए।

सेठ और नागर के इस्तीफे के बाद से ही अटकलें लगाई जा रही थीं कि इनका अगला ठिकाना भगवा ही है। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के करीबी रहे संजय सेठ का भाजपा में शामिल होना उत्तर प्रदेश में बीजेपी की उसी बढ़ती ताकत का नमूना है, जिसके सहारे बीजेपी ने 2017 में ऐतिहासिक बहुमत के साथ यूपी सत्ता का सूखा समाप्त किया है।

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