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रक्षा मंत्री के जुबानी OROP विवाद की कहानी!


नई दिल्ली: केंद्र की सत्ता पर काबिज नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले काफी दिनों से अटके पड़े ओआरओपी को लागू किया। सरकार के इस फैसले के तहत एक रैंक के जवानों को एक तरह के ही पेंशन दिए जाने पर सहमति बनी।

लेकिन सरकार के इस फैसले से नाराज हरियाणा के रहने वाले पूर्व सैनिक सूबेदार राम किशन ग्रेवाल ने बीते दिन दिल्ली में आत्महत्या कर ली। ग्रेवाल की आत्महत्या के मामले पर सरकार के सभी विरोधियों ने सरकार पर निशाना साधा और जम कर बवाल काटा।

मामले में अपनी सरकार की किरकिरी होता देख रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को भी सामने आना पड़ा। गौर हो कि विरोधियों का आरोप है कि सरकार ओआरओपी को बिना लागू किए ही इसकी बाहबाही लूट रही है।

जिसके जवाब में गुरुवार को रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा लागू किए ओआरओपी का लाभ 90 % जवानों को मिल रहा है। पर्रिकर ने कहा कि ओआरओपी में कुछ तकनीकी कारणों के चलते अन्य जवानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे जल्द ही खत्म कर दिया जाएगा।

आपको बता दें कि मृतक पूर्व सैनिक ने अपनी समस्या को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देने के बाद रक्षा मंत्री के नाम एक पत्र भी लिखा, लेकिन उस पत्र का जवाब मिलने से पहले ही उन्होंने आत्महत्या करने का फैसला कर लिया।

आज गुरुवार को सूबेदार राम किशन ग्रेवाल के अंतिम संस्कार में दिल्ली की मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए। इस दौरान केजरीवाल ने पीड़ित परिवार से मुलाकाता की और एक करोड़ की सहायता राशी देने का ऐलान किया।

इसके अलावा केजरीवाल ने मृत जवान को शहीद का दर्जा भी दिया। लेकिन इस मामले पर हरियाणा सरकार के मंत्री अनिल विज ने केजरीवाल के इस फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आत्महत्या करने वाले पूर्व सैनिक को शहीद का दर्जा देना गलत है।

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