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Death Story: मरे नहीं मारे गए थे शास्त्री जी- किसने दिया था दूध में जहर...

नई दिल्ली: भारत के एक ऐसे प्रधानमंत्री का आज पुण्यतिथी है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र के नाम समर्पित किया और यहां तक की मौत भी देश के नाम समर्पित कर दिया। वो कोई और नहीं आजाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री थे, जिन्होंने ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया। अपने पूरे जीवन में वह संघर्ष करते रहे लेकिन आजादी के इतने सालों बाद भी किसान की हालत देख ऐसा लगता है जैसे देश की अन्य सरकारों ने पूर्व प्रधानमंत्री की आत्मा की शांति के लिए कुछ भी नहीं किया!

लालबहादुर शास्त्री का जन्म दो अक्टूबर 1904 उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था, वह करीब 18 महीने तक भारत के प्रधानमंत्री रहे, और इस दौरान 11 जनवरी 1966 को उनकी मैत हो गई थी। दरअसल आजादी के बाद शास्त्री को उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव नियुक्त किया गया था। इस दौरान उन्हें गोविंद बल्लभ पंत के मन्त्रिमण्डल में पुलिस एवं परिवहन मन्त्रालय का भार सौंपा गया। परिवहन मन्त्री रहते हुए उन्होंने पहली बार महिला कण्डक्टर्स की नियुक्ति कराई औक पुलिस मन्त्री रहते हुए उन्होंने भीड़ को नियन्त्रण में रखने के लिये लाठीचार्च करने के बजाय पानी की बौछार करने की शुरुआत किया।

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भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद साल 1964 में शास्त्री को देश का प्रधानमन्त्री बनाया गया। उन्होंने 9 जून 1964 को भारत के प्रधानमन्त्री का पद भार संभाल था। शास्त्री के शासनकाल के दौरान साल 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध शुरू हुआ। जबकि इससे तीन साल पहले ही भारत और चीन के बीत युद्ध हुआ था, जिसमे भारत को हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि इसके बाद भी भारत ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी और अपनी तब भारत इस युद्ध को जीत लिया।

रहस्यमय परिस्थितियों में मौत

युद्ध समाप्त होने के बाद शास्त्री ताशकन्द में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब ख़ान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने गए जहां 11 जनवरी 1966 की रात में ही रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। शास्त्री की मौत को लेकर कई तरह की बाते की जाती है। बताया जाता है कि शास्त्री जहां भी जाते थे उनके साथ एक रसोइया होता था जो उनके लिए खाना बनाने का काम करता था।

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बताया जाता है कि शास्त्री का रसोइया उनके साथ ताशकन्द भी गया था, लेकिन इसी बीच शास्त्री के रसोइये का अपहरण कर लिया गया और इसके बाद किसी दूसरे रसोइये को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी गई। कहा जाता है कि शास्त्री रात में खाना नहीं खाते थे, सिर्फ दूध पी कर ही सोते थे, इस रात शास्त्री को नए आदमी (रसोइये) ने दूध दिया, जिसमें जहर मिलाया गया था।

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दूध पीने के बाद शास्त्री की तबीयत खराब हो गई, उन्होंने काफी अवाजें लगाई लेकिन वहां कोई नहीं आया, जिसके बाद लोगों को पता चला की उनकी मौत हो चुकी है। हालांकि जहर देने की बात प्रमाणित नहीं हुआ और बताया गया कि उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। जिसके बाद उनके शव को भारत लाया गया, जहां उनके डॉक्टरों ने उन्हें देखने की मांग की लेकिन इसकी इजाजत नहीं मिली। जिसके बाद शास्त्री की पत्नी ललिका शात्री ने भी ऐसी ही मांग रख दिया, तब शात्री के शरीर को देखा गया। जिसके बाद बताया गया कि इस दौरान उनका शरीर निला पड़ गया था, (जो कि अक्सर जहर खाकर मरने वाले लोगों के साथ होता है) कुछ जानकारों का मानना है कि अगर इस बात की जांच की जाती तो सच सामने जरूर आता।

आपको बता दें कि लालबहादुर शास्त्री अपनी सादगी और  देशभक्ति के लिए जाने जाते हैं, जिन्हें मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया।

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