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एक जवान की मां ने पूछा लोगों से सवाल, पिछले 30 महीनों से कोमा में है लेकिन क्या किसी को फ़िक्र है?

NEW DELHI:- आज कल देश बहुत गुस्से में है क्योंकि सभी को इस देश के जवानों और उनकी ज़िन्दगी की चिंता है। आये दिन कश्मीर सीमा पर दुश्मनों से मुठभेड़ में बहुत से जवान शहीद हो रहे हैं और ये देश गुस्से में है। हर कोई अपने घर में इन ख़बरों को टीवी आदि पर देखता सुनता पढ़ता है और उबलने लगता है। नाराज़ होने वाली बात है भी क्योंकि भला कौन चाहेगा कि उसके देश की रक्षा करने वाले की जान यूं चली जाए।

इंडियन आर्मी शब्द सुनते ही सबका सीना गर्व से ऊंचा हो जाता है कश्मीर तो लोगों को लगभग दुश्मन लगने लगा है। आज हम आपको देश के पूर्वी भाग में ले जाना चाहते हैं जहां हमारे देश के कुछ लोगों और सरकार में सालों से जल जंगल ज़मीन को लेकर एक टकराव चल रहा है और हज़ारों की संख्या में लोग मारे जा रहे हैं। हम आपका ध्यान नक्सल प्रभावित इलाकों की तरफ़ ले जाना चाहते हैं।

अच्छा सी आर पी एफ़ का नाम सुनकर आपके दिमाग में कैसी छवि उभरती है? आपके मन में क्या वही भावना उत्पन्न होती है जो इंडियन आर्मी का नाम सुनते ही आपके अन्दर घर कर जाती है? आप सोचियेगा इस बारे में। नक्सल प्रभावित इलाकों में सी आर पी एफ़ के जवान एक बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं और हर साल उनसे होने वाली मुठभेड़ में कई सी आर पी एफ़ जवान मारे जाते हैं और एक घायल जवान की मां आपसे एक शिकायत कर रही है।

ऊपर तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति का नाम है सी आर पी एफ़ जवान जीतेन्द्र कुमार और ये पिछले 30 महीनों से अस्पताल में हैं। एक साल तक नौकरी करने के बाद पिछले दिनों जब वो पैरामिलिट्री के जवान और इलेक्शन स्टाफ़ के साथ जा रहे थे तब इनपर हमला हुआ और ये कोमा में चले गए और फिर दोबारा कभी सामान्य नहीं हो पाए।

उनकी मां आपसे पूछ रही हैं कि इस बात से आप नाराज़ क्यों नहीं हैं? मेरा बेटा भी तो इस देश की रक्षा कर रहा था...!

आपको नहीं लगता कि उनका सवाल वाजिब है? हमें तो बिल्कुल वाजिब लगता है। इंडियन आर्मी के अलावा आपको दूसरी फोर्सेज की कितनी जानकारी है? क्या आपको पता है कि वो कैसी परिस्थितियों में रहते हैं? उनको कितनी सुविधाएं मिलती हैं? उनकी तनख्वाह कितनी है? यकीन मानिए आपको ये सब जानना चाहिए और इसपर सवाल भी खड़े करने चाहिए।

जीतेन्द्र के डॉक्टर कहते हैं कि उनके सिर में चोट लगी है और वो फिजियोथेरेपी से गुज़र रहे हैं. वो अब थोड़ा हिल-डुल पाने में सक्षम हैं।

उनकी मां वही कह रही हैं जो सी आर पी एफ़ अथॉरिटी भी कहती आई है कि हम भी देश की रक्षा करते हैं लेकिन जब कोई सी आर पी एफ़ जवान किसी घटना का शिकार होता है तो देश में कोई सवाल नहीं पूछता और कोई गुस्सा नहीं दिखाई देता! इन्हें भी एक मां जन्म देती है। आख़िर इनके प्रति लोगों को सहानुभूति क्यों नहीं है?