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कोयला घोटाला : पूर्व कोयला सचिव HC गुप्ता समेत 3 अधिकारियों को सजा, सीबीआई के मांग को किया...

नई दिल्ली : तकरीबन 6 वर्षों से चली आ रहीं केस का नतीजा आज यानी 5 दिसम्बर को निकला। जिसका इंतजार सीबीआई बहुत ही अरसे से कर रहीं थी। हालांकि दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश रचने के मामले में कोयला मंत्रालय के पूर्व सचिव एचसी गुप्ता, पूर्व संयुक्त सचिव केएस क्रोफा और पू्र्व निदेशक को 3 साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा कोर्ट ने तीनों पर 50 हजार का जुर्माना भी लगाया है। वहीं निजी कंपनी विकास मेटल्स एंड पावर लिमिटेड के प्रमोटर विकाश पटनी और उनके सहयोगी आनंद मलिक को 4 साल की सजा सुनाई है। विकास मेटल्स एंड पावर लिमिटेड कंपनी को पश्चिम बंगाल स्थित मोरिया और मधुजोड़ (उत्तर व दक्षिण) में स्थित कोयला खदानों का नियमों का उल्लंघन कर आवंटन किया था। आपको बता दे कि सीबीआई ने इस मामले को सितंबर 2012 में केस दर्ज किया था। फैसला सुनाने के बाद सभी पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। आपको बता दें कि इस केस की सुनवाई स्पेशल सीबीआई जज भारत पराशर ने की ।

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इससे पहले पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सभी दोषियों को अधिकतम 7 साल की सजा देने की अपील की थी। जिसे खारिज करते हुए कोर्ट ने इन आरोपियों को मात्र 3 साल की सजा सुनाई। सीबीआई ने कोर्ट से ये भी कहा था कि दोषियों ने हर प्रयास किया था कि गवाह कोर्ट तक न पहुंच पाए। राष्ट्रहित में देखे तो 1 लाख 86 हज़ार करोड़ का नुकसान का अनुमान लगाया गया था। प्रवर्तन निदेशालय( ईडी) ने भी मामले में जांच की थी। सीबीआई ने कोर्ट से ये भी कहा था कि कोयला घोटाले की गंभीरता को इससे आंका जा सकता है कि सीबीआई ने इसमें 55 एफआईआर दर्ज किया था। बहरहाल सभी दोषियों ने कोर्ट से कम से कम सजा देने की गुजारिश की थी। दोषियों ने कोर्ट से कहा था कि 1 लाख 86 हज़ार करोड़ के नुकसान का अनुमान गलत है, क्योंकि उन्होंने खद्दान का लीज नहीं दिया गया था। आज भी कोयला खद्दान सरकार के पास है।

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पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता ने कोर्ट से ये भी मांग की थी उनको कम से कम सजा दी जाए, क्योंकि वो बीमार रहते हैं और वे अपने घर मे कमाने वाले अकेले शख्स हैं। उनके बच्चे अभी भी पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं निजी कंपनी विकास मेटल्स एंड पावर लिमिटेड के प्रमोटर विकाश पटनी ने कोर्ट से अपील की कि उनके कंपनी पर जुर्माना कम से कम लगाया जाए क्योंकि उनकी कंपनी अभी घाटे में चल रही है। मुकदमा दर्ज होने के बाद से कंपनी पर वित्तीय संकट मंडराने लगा था।

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