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72 दिनों बाद भी कांग्रेस को नहीं मिला संपूर्ण अध्यक्ष

नोएडा : राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद करीब 72 दिनों से जारी उठापटक के बाद भी कांग्रेस के लिए संपूर्ण अध्यक्ष की तलाश खत्म नहीं हुई, बल्कि देश की सबसे पुरानी पार्टी को अब भी अंतरिम अध्यक्ष से ही काम चलाना होगा। लेकिन इस कामचलाउ फैसले को लेकर कांग्रेस पार्टी नई मुश्किल में घिरते दिख रही है। करीब ढाई महीने की तलाश के बाद भी पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाथों में पार्टी की कमान सौंपे जाने के बाद कांग्रेस और गांधी परिवार पर चिंटिंग के आरोप भी लगने लगे हैं।

चिंटिंग, चिटिंग, चिटिंग... कांग्रेस पार्टी चिंटिंग कर रही है...याद किजिए कि हार का ठिकरा अपने सिर फोड़ते हुए राहुल गांधी ने क्या कहा था, सोनिया गांधी ने भी अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया से अपने आप को अलग कर लिया था। लेकिन हुआ वहीं जिसकी आशंका पहले से थी। सियासी गणित समझने वालों को पता था कि गांधी परिवार के बिना कांग्रेस पार्टी का कोई वजूद नही। और कांग्रेस पार्टी ने 72 दिनों के सर्च अभियान के बाद सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष चुनकर इसे साबित भी कर दिया।

करीब तीन महीने से अध्यक्ष विहीन चल रही कांग्रेस पार्टी ने जब शनिवार को वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई तो लगा आज फैसला हो ही जाएगा। क्योंकि कांग्रेस ने भी साफ किया था कि महीनों से जारी इस असमंजस की स्थिति का निवारण आज ही होगा। इसलिए कांग्रेस पार्टी में दिन की बैठक में ही रात की बैठक का समय तय कर लिया।

तय समय पर रात 8 बजे CWC की अगली मिटिंग भी शुरू हुई। दिन की बैठक से अचानक केरल रवाना हुए राहुल गांधी रात की बैठक में शामिल हुए, जबकि उनकी मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका गांधी पहले से बैठक में मौजूद थी। अंदर बैठक और मीडिया के कैमरे तने थे। अभी बैठक खत्म भी नहीं हुई कि राहुल गांधी मीडिया के सामने प्रकट हुए तो ऐसा लगा जैसे राहुल गांधी आज कुछ तूफानी करने वाले हैं, लेकिन राहुल गांधी दिल्ली से ही कश्मीर का नजारा दिखाया और चलते बने।

जिसके कुछ समय बाद खबर आई कि कांग्रेस ने पुरानी बोतल को नये लेबल के साथ पेश कर दिया और 72 दिन से जारी ऊहापोह की स्थिति के बाद आखिरकार सोनिया गांधी को ही पार्टी का सिरमौर बना दिया गया।

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