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कांग्रेस की सरकार ने 28 बार चैनलों को किया था बैन, लेकिन तब हल्ला क्यो नहीं मचा...!

NEW DELHI:- इन दिनों सोशल मीडिया पर NDTV इंडिया बहुत तेजी से ट्रोल कर रहा है लेकिन क्या यह पहला है चानल जिसे बैन किया है तो जवाब है नही। इसी बैन को लेकर बीजेपी या फिर कहे मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है।

चैनल बैन के फैसले को ‘सत्तावादी’, ‘अघोषित आपातकाल’ और ‘अस्वीकार्य’ जैसी उपमाएं दी जा रही हैं। तो वहीं सरकार समर्थकों का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, लेकिन हल्ला ज्यादा मचाया रहा है। यूपीए के समय से चैनलों का टेलिकास्ट रोका जाता रहा है।

 यूपीए ने अपने राज में 28 बार बैन किए चैनल

मौजूदा सरकार के पक्ष में सूचना-प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों की दलील है कि चैनलों के खिलाफ ऐसे एक्शन यूपीए के शासनकाल में भी लिए गए और यूपीए ने ही ऐसी कार्रवाइयों की नींव डाली थी। आंकड़े बताते हैं कि 2005 से 2013 के बीच 20 चैनलों को 28 बार बैन किया गया। ये बैन एक दिन से लेकर दो महीने तक के थे।

कैन से चैनल कितने दिनों के लिए हुए बैन

 1. जनमत, 2007

2007 में न्यूज चैनल ‘जनमत TV’ का प्रसारण एक महीने के लिए रोक दिया गया था। वजह, एक फर्जी स्टिंग, जिसमें एक लेडी स्कूल टीचर को सेक्स रैकेट मामले में फंसाया गया था। टीचर का नाम उमा खुराना था और स्टिंग का दावा था कि वह स्कूली छात्राओं का सेक्स रैकेट चलाती हैं। खबर के बाद तुर्कमान गेट स्थित सरकारी स्कूल के बाहर जमकर हंगामा हुआ था। भीड़ ने उमा खुराना को जान से मारने की कोशिश की थी और उनके कपड़े फाड़ दिए थे। दबाव के बाद पुलिस ने उमा को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन छानबीन के बाद उमा को बेकसूर पाया गया।

जब ये स्टिंग चैनल पर चला, तब सुधीर चौधरी इसके सीईओ-संपादक थे। अब वो ज़ी न्यूज के एडिटर हैं और उन पर कोल स्कैम की खबर न दिखाने के एवज में जिंदल ग्रुप से 100 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने का आरोप है। फिलहाल वो जमानत पर बाहर हैं।

2. फैशन टीवी, 2007, 2010, 2013

फैशन के ग्लोबल ट्रेंड्स दिखाने वाले FTV (फैशन टीवी) को 2007 से 2013 के बीच तीन बार ऑफ एयर किया गया। पहला बैन लगा दो महीने का, जब चैनल ने ‘मिडनाइट हॉट’ नाम का प्रोग्राम चलाया था। 2010 में चैनल ने टॉपलेस लड़कियों के विजुअल दिखाए, तो 9 दिनों का बैन लगा। 2013 में अडल्ट विजुअल्स दिखाने पर 10 दिनों का बैन लगाया गया।

3. महुआ टीवी, 2013

25 अप्रैल, 2013 को महुआ टीवी के खिलाफ एक दिन के बैन का आदेश जारी हुआ था, क्योंकि चैनल ने ‘ए’ सर्टिफिकेट वाली दो फिल्में ‘औलाद’ और ‘एक और कुरुक्षेत्र’ दिखा दी थीं।

4. AXN, 2013

25 अप्रैल, 2013 को ही AXN पर भी ‘ए’ सर्टिफिकेट वाली फिल्म ‘डार्कनेस फाल्स’ हिंदी में दिखाने की वजह से एक दिन का बैन लगाने का आदेश जारी हुआ था।

5. मूवीज ओके, 2013

1 मई, 2013 को मूवीज ओके चैनल के खिलाफ एक दिन के बैन का आदेश जारी हुआ था, क्योंकि इसने ‘ए सर्टिफिकेट’ वाली फिल्म ‘दिलजले’ दिखाई थी।

6. कॉमेडी सेंट्रल, 2013

17 मई, 2013 को कॉमेडी सेंट्रल चैनल के खिलाफ 10 दिनों के बैन का आदेश जारी हुआ था, क्योंकि इसने ‘स्टैंड अप क्लब’ प्रोग्राम दिखाया था।

7. WB, 2014

16 जनवरी, 2014 को ‘WB’ चैनल के खिलाफ एक दिन के बैन का आदेश जारी हुआ था, क्योंकि इसने ‘V/UA’ सर्टिफिकेट वाली फिल्म ‘इट्स अ बॉय गर्ल थिंग’ दिखाई थी।

उस समय और अब के समय के बैन में क्या फर्क है?

कई चैनलों पर बैन तो पहले भी लगे हैं, फिर NDTV के बैन को ही क्यों ‘अघोषित आपातकाल’ कहा जा रहा है? क्यों बाकी चैनलों को बैन किया गया, तो ऐसी आवाज नहीं उठी, जैसी अब NDTV इंडिया के पक्ष में उठ रही है?

इससे पिछली सरकार के समय में ‘जनमत टीवी’ को छोड़कर एक भी न्यूज चैनल को बैन नहीं किया गया। वे फिल्मों और मनोरंजन के दूसरे चैनल थे। ‘जनमत टीवी’ वाला केस बेहद लापरवाही भरा था और उसमें एक बेकसूर महिला को एक बेहद गंभीर और घिनौने अपराध में फंसाने की कोशिश की गई थी। ये एक संपादकीय भूल थी और सरकार ने इस पर बड़ा फैसला लिया।

हालांकि सरकारों ने चैनलों को एडवाइजरी भेजी थी जिसमें कहा गया है कि किसी भी एंटी-टेरर ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों की लोकेशन और मूवमेंट के बारे में रिपोर्टिंग न करें। इस मसले पर एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 29 अगस्त 2013 को एक जरूरी टिप्पणी की। कोर्ट ने मुंबई हमले के समय भारतीय टीवी चैनलों की कवरेज को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाला’ बताया और कहा कि इससे देश-समाज को कोई फायदा नहीं हुआ।