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एनडीटीवी के समर्थन में उतरने वालों को सरकार ने दिया जवाब!

नई दिल्ली:  पंजाब के पठानकोट में भारतीय वायुसेना के अड्डे पर दो जनवरी को हुए आतंकी हमले के दौरान प्रसारण नियमों का उलंघन के आरोप में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एनडीटीवी इंडिया चैनल के प्रसारण पर एक दिन के लिए रोक लगाने का फैसला किया है।

लेकिन सरकार के इस फैसले के खिलाफ अब देश का हर तबका एनडीटीवी इंडिया को समर्थन कर रहा है। अपनी सरकार की लगातार हो रही आलोचलाओं पर पलटवार करते हुए शनिवार को केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री एम. वेंकैया नायडू को सामने आना पड़ा।

नायडू ने प्रेस की आजादी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश की सुरक्षा से किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस बात पर लोगों को विचार करना चाहिए की देश की सुरक्षा जरूरी है, या टीवी चैनलों की टीआरपी।

सरकार के इस फैसले के बाद एनडीटीवी इंडिया को 8-9 नवंबर के बीच 24 घंटे के लिए चैनल का प्रसारण बंद करना पड़ेगा, हालांकि चैनल ने अपने उपर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि उस घटना का प्रसारण चैनल ने सबसे ज्यादा संतुलित तरीके किया था।

नायडू ने कहा कि इससे पहले यूपीए की सरकार में आपत्तिजनक दृश्यों के प्रसारण को लेकर 21 बार प्रतिबंध लगा चुकी है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या दिन में आतंक रोधी कार्रवाई का लाइव कवरेज करना देश के लिए खतरा नहीं है? उन्होंने कहा कि लोग इस बात को जानते है कि सबसे ज्यादा गंभीर क्या है।

गौर हो कि मामले को आपातकाल की स्थितियों से जोड़े जाने वाले सवालों को लेकर कहा कि उस दौरान भाजपा के नेताओं ने सबसे ज्यादा कष्ट झेले थे, और वह इस तरह का कष्ट दूसरे को देने के बारे में कभी नहीं सोच सकते है।

इस दौरान नायडू ने यह भी कहा कि एनडीटीवी इंडिया पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का लोगों ने भरपूर साथ दिया है, इससे वह बेहद खुश है। हालांकि बीते दिन सरकार के इस फैसले पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन, इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन और ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एडिटर्स कॉफ्रेंस ने आलोचना करते हुए इस प्रतिबंध को वापस लेने की मांग की है।

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