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भारी दवाब के बाद उन्नाव कांड में बड़ा एक्शन

नोएडा: केंद्र की मोदी सरकार हो या उत्तर प्रदेश की योगी सरकार, ये सभी अलग-अलग प्रकार से जनता को रामराज्य के सपने दिखाते नहीं थकती, लेकिन जमीनी हकीकत रावणराज की याद दिलाती है, जहां कानून के लंबे हाथ बैने हैं, पुलिस वालों की ताकत नेताओं की जूती के नीचे और सीबीआई की तो मानो कुछ औकात ही नहीं!

दरअसल, ये पूरा मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव से जुड़ा है, जहां बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर और उसके लोगों ने भोली-भाली जनता का जीना दुश्वार कर रखा है। हां यह सच है कि न्यू इंडिया में बलात्कारियों के लिए मौत की सजा भी नाकाफी है, लेकिन अगर ये पाप किसी विधायक का हो तो उसके सामने पूरी सिस्टम नतमस्तक हो जाती है।

वैसे तो बलात्कार का आरोपी सेंगर फिलहाल जेल की हवा खा रहा है, लेकिन आरोप है कि उसके गुंडे जेल के बाहर लोगों की जान पर बन आए हैं। विपक्ष की माने तो आरोपी विधायक को सरकार से सह प्राप्त है, जिसके कारण वह जेल में रहकर भी दहशत फैलाने में कामयाब होता जा रहा है।

तस्वीरों में दिख रहे बीजेपी विधायक सेंगर नाबालिग से सामूहिक बलात्कार का आरोपी है, लेकिन इसके दंबग रसूख के सामने पुलिस-प्रशासन की एक नहीं चलती। रेप के मामले में पुलिस शिकायत दर्ज करने में आनाकानी करती है, भारी दवाब के बाद मामला सीबीआई को सौंपा जाता, विधायक की गिरफ्तारी भी होती है, लेकिन अभी सीबीआई किसी नतीजे पर पहुंचती कि पीड़िता के पूरे परिवार को रौंद दिया जाता है।

लेकिन यूपी की योगी और दिल्ली की मोदी सरकार के लिए सब कुछ ठिक लगता है, संसद में सरकार की गौरवगाथा गाते नेताओं की जुबान नहीं थकती, वो तो भला हो विपक्ष का जिसके दवाब में आई सरकार को एक बार फिर अपनी लाइन बदलनी पड़ी।

बता दें कि रेप पीड़िता के साथ हुए सड़क दुर्घटना मामले की जांच भी अब सीबीआई के हवाले है। सीबीआई ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई समेत 10 लोगों के खिलाफ नामजद और 15-20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया है।

यह केस सीबीआई लखनऊ की ऐंटी करप्शन ब्रांच ने दर्ज किया है। अब सीबीआई ही इस मामले की सच्चाई पता लगाएगी कि यह एक हादसा था या साजिश। गौरतलब हो कि 28 जुलाई को घटी घटना में पीड़िता और उसका वकील मौत से जंग लड़ रहे हैं, जबकि इसी हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो चुकी है।

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