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66 साल बाद भी नहीं सुलझी मुखर्जी की रहस्यमयी मौत, नेहरू पर लगे गंभीर आरोप

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाने की वकालत करने वाले डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य पार्टी नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं बीजेपी कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी रहस्मयी मौत का मामला उछालते हुए कांग्रेस पार्टी पर जोरदार हमला बोला।

6 जुलाई 1901 को कोलकाता में जन्मे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 23 जून 1953 को जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में अंतिम सांस ली थी। रविवार को उनके पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने एकत्रित हुए भाजपा नेताओं को अपने पथ प्रदर्शक की मौत पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर ठिकरा फोड़ दिया।

भारतीय जनसंघ के संस्थापक मुखर्जी को बलिदान दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नड्डा ने कहा कि उन्होंने जो काम किए वे उस समय से बहुत आगे के थे। उनके प्रयासों का नतीजा है कि आज पश्चिम बंगाल और कश्मीर भारत के अभिन्न अंग हैं। वहीं उनके रहस्मयी मौत के मामले को लेकर नड्डा ने कहा कि पूरा मुखर्जी की मौत की जांच की मांग कर रहा था, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जांच का आदेश नहीं दिया। इतिहास गवाह है लेकिन उनका बलिदान बेकार नहीं जाएगा।

आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लेने वाले मुखर्जी ने संसद में अपने भाषण के दौरान धारा-370 को समाप्त करने की जोरदार वकालत की थी। अगस्त 1952 में जम्मू की विशाल रैली संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा था कि या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊंगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अपना जीवन बलिदान कर दूंगा।

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