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नोटबंदी और GST पर खतरनाक खुलासा- पूरी जानकारी लेनी ही होगी...

नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार ने पिछले साल 8 नवंबर 2016 को देश भर में नोटबंदी का ऐलान किया, जिसके तहत पांच सौ रुपये और एक हजार रुपये के पुराने नोटो को चलन से बाहर कर दिया गया। देश को हिलाकर रख देने वाले इस फैसले को लेकर सरकार ने कहा कि इसका असरा गरीब लोगों पर नहीं बल्कि अमीर और काले धन वालों पर होगा। लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट के हवाले से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

बता दें कि चाहे अमीर हो या गरीब नोटबंदी का कुछ न कुछ असर तो सभी लोगों के उपर पड़ा है। ऐसे में फॉर्ब्स की रिपोर्ट बेहद ही चौंकाने वाली है। दरअसल फॉर्ब्स ने भारत के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट जारी की है, जिसमें मुकेश अंबानी ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। 38 अरब डॉलर यानी 2.5 लाख करोड़ की संपत्ति के साथ वो इस बार फिर से पहले स्थान पर हैं। यही नहीं देश आर्थिक संकटों से जुझ रहा है जबकि भारतीय अमीरों की संपत्ति में 26% की बढ़ोतरी बताई जाती है।

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अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार करने वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी पिछले कई साल से भारत के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। लेकिन पिछला साल उनके लिए कुछ ज़्यादा ही फायदेमंद रहा। दरअसल नोटबंदी और जीएसटी के बावजूद पिछले एक साल में उनकी संपत्ति 67% बढ़ी है। उनकी कुल संपत्ति (नेटवर्थ) बढ़कर 38 अरब डॉलर यानी 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

इस लिस्ट को समझने के बाद ऐसा लगता है कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण केवल देश के गरीबों की ही कमर टूट रही है। अंबानी के आलावा देश के सभी अमीरों की संपत्ति में इज़ाफा हुआ है। शीर्ष 100 अमीर लोगों की संपत्ति में 26% का इज़ाफा बताया जाता है। इन अमीरों की संपत्ति 31 लाख करोड़ तक हो गई है।

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गौर हो कि इस बात पर फोर्ब्स पत्रिका ने भी हैरत करते हुए कहा कि “भारत में नोटबंदी और जीएसटी के कारण आर्थिक स्थिति जगमगा गई, लेकिन इसके बावजूद शीर्ष अमीरों की संपत्ति 26% बढ़ी है। ये आकड़ा खुश होने वाले नहीं बल्कि डराने वाला है। क्योंकि देश का गरीब वर्ग इस समय अर्थव्यवस्था में आई मंदी का शिकार हो रहा। नोटबंदी और जीएसटी के कारण लाखों लोगों के रोज़गार ठप पड़ गए, व्यापारी भी नए टैक्स सिस्टम से परेशान हैं।

वहीं दूसरी ओर देश के शीर्ष अमीरों की संपत्ति में इज़ाफा ही होता जा रहा है। इस तरह देश में आर्थिक खाई और भी चौड़ी हो रही है। गौरतलब हो कि ग्लोबल हेल्थ डाटाबुक की रिपोर्ट भी बताती है कि भारत में 58.4% सम्पत्ति की मलिक 1% जनता है।

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