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आर्थिक सर्वे से पहले जानिए क्या है अपने देश के अर्थव्यवस्था का हाल, बताएंगे ये पांच आंकड़े

नोएडा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल का शुक्रवार यानी 5 जुलाई को बजट पेश होने है। इससे एक दिन पहले गुरूवार को देश का आर्थिक सर्वे पेश किया जाना है, जो आम बजट के भविष्य की रूपरेखा तय करेगा। लगातार दूसरी बार शासन में आने के बाद मोदी सरकार पर हर किसी की नज़र टिकी हुई है, कोई उनकी तरफ रोजगार, कोई स्वास्थ्य, कोई विदेशी निवेश तो कोई मेक इन इंडिया को लेकर उनपर निगाहें टिकाएं हुए है। जिससे देश की अर्थव्यवस्था गतिमान हो सके।

इकोनॉमी सर्वे से पहले इन 5 आंकड़ों से जानिए आखिर क्या है देश की अर्थव्यवस्था का हाल

आयुष्मान योजना  

'आयुष्मान भारत' पीएम मोदी के उन सभी चुनिंदाओं योजनाओं में से एक है, जिसे प्रधानमंत्री जन आरोग्य के नाम से भी जाना जाता है। पिछले साल 2018-19 में आयुष्मान भारत पर 2,400 करोड़ का बजट आवंटित किया गया था, जिसके बाद यह अनुमान लगाया जाने लगा कि 2019-20 के वित्त वर्ष में दोगुने से भी ज्यादा बजट आवंटित किया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि इस बार बजट में आयुष्मान भारत के लिए 6,400 करोड़ रुपए आवंटित किये जा सकते है।

उज्ज्वला योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनानव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का जमकर जिक्र किया था, उन्होंने कहा था कि इससे ग्रामीण अंचलों और गरीब महिलाओं को काफी फायदा मिला हैं। आपको बता दें कि इस योजना की शुरुआत का मकसद कमजोर वर्ग के परिवारों खासकर महिलाओं को धुएं और गंभीर बीमारियों से राहत दिलाना था। इस योजना को 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया में लॉन्‍च किया गया था। जिस दौरान इस योजना के लिए 2,500 करोड़ खर्च का आवंटन किया गया था। जो 2017-18 में बढ़कर 2,251 करोड़ हो गया। अनुमान है कि इस बार के वित्तीय वर्ष में यह राशि बढ़कर 3,200 करोड़ तक पहुंच जाएगी।

विदेशी निवेश में वृद्धि की संभावना

भारत में 2017-18 की तुलना में 2018-19 में एफडीआई (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) में मामूली कमी आई। इससे यह 44.9 बिलियन डॉलर से घटकर 44.4 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया था। अगर हम 2015-16 की बात करे तो, 2015-16 से लेकर हर साल देश में 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा विदेशी निवेश हुए है। 2004-05 में एफडीआई 3.2 बिलियन डॉलर था और इसमें लगातार वृद्धि ही देखी गई है। आशा है कि इस बार बजट में कुछ ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि एफडीआई 45 बिलियन डॉलर के सर्वोच्च आंकड़े को पार कर जाए।

मनरेगा में बजट की बढ़ोतरी की संभावना

आपको बता दें कि देश में बेरोजगारी की दर अपने 4 दशक के इतिहास में सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। ऐसे में निचले वर्ग के लोगों को मनरेगा से  काफी आस हैं, जिससे उन्हें रोजगार मिल सके। 2015-16 में औसतन रोजगार 49 दिन था जो 2018-19 में बढ़कर 51 दिनों का हो गया। मनरेगा के तहत 2015-16 में जहां 35,975 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई थी, जो 2018-19 में बढ़कर 62,185 करोड़ हो गई। जनवरी-मई के बीच बेरोजगारी की दर 7 फीसदी तक पहुंच गई है। नए बजट में मनरेगा में राशि की बढ़ोतरी की काफी उम्मीद है क्योंकि जिस प्रकार महंगाई बढ़ता जा रहा है, उस एवज में अगर राशि की बढ़ोतरी नहीं की गई तो लोग इस योजना से भी दरकिनार करने लगेंगे। इससे बेरोजगारी की दर में और अधिक गिरावट हो जाएगी।

मेक इन इंडिया

2014 में सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2014 को स्वदेशी अभियान के तहत मेक इन इंडिया योजना की शुरुआत की थी जिसमें 25 सेक्टर्स को शामिल किया गया। 2014-15 में 5.4 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट रूके हुए थे जिसमें 3.3 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट निजी क्षेत्रों के थे। 2018-9 में यह बढ़कर 6.7 लाख करोड़ रुपए का हो गया। लेकिन 2018-19 में कुल 169 प्रोजेक्ट अधर में लटके थे जिसमें से 97 तो निजी क्षेत्रों के थे। इसके अतिरिक्त 10.1 लाख करोड़ के नए प्रोजेक्ट आ सकते हैं जिसमें 6.6 लाख करोड़ निजी क्षेत्रों के हैं। बता दें कि मेक इन इंडिया अभियान के तहत 5.9 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट पूरे हुए, जिसमें 2.7 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। अब आशा होगी कि इस बार कई ऐसे बंद प्रोजेक्ट्स चालू हो जो किसी कारण से रूके हुए है। और मेक इन इंडिया अभियान कामयाबी की ओर बढ़े।

अब देखना यह है कि मोदी सरकार का इस बार की बजट किस तरह का होता है और समाज के कितने वर्ग को इसका लाभ मिलता है।

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