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और मजबूत हुई मोदी सरकार की ताकत, सांसद में पास किया आतंक विरोधी बिल

नोएडा : आतंकवाद के खिलाफ अपने बुलंद इरादों के साथ एक और कदम बढ़ाते हुए मौजूदा मोदी सरकार ने, गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम संशोधन, यानी यूएपीए 2019 बिल लोकसभा से पास करा लिया। सत्ता और विपक्ष के टकराव के बीच पारित हुआ विधेयक कानून का रूप लेगा, इस कानून के अमल में आने के बाद सरकार और सरकारी एजेंसियों की ताकत बढ़ेगी। इसके बाद अब आतंकित मामलों में आरोपियों के बचने के चांस न के बराबर होंगे।

आइये आपको विस्तार से बताते हैं आखिर इस बील में नया क्या है? और आखिर ऐसी कौन सी जरूरत पड़ी की सरकार को बील में संसोधन करना पड़ा?

यह कानून सरकार को सशक्त बनाता है कि वे किसी व्यक्ति विशेष को आतंकवादी घोषित कर सके।

आतंकी गतिविधियों में संलिप्त होने की आशंका के आधार पर किसी अकेले व्यक्ति को आतंकी घोषित किया जा सकता है।

आतंकियों की आर्थिक और वैचारिक मदद करने वालों और आतंकवाद के सिद्धांत का प्रचार करने वालों को भी आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान है।

आतंकवाद के मामले में एनआईए का इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी भी जांच कर सकता है।

आतंकवादी गतिविधि पर संपत्ति जब्त करने से पहले एनआईए को अपने महानिदेशक से मंजूरी लेनी होगी।

आपको बता दें कि एनआईए भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी है, जो मुख्यत: आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच करता है। और आतंक विरोधी कानून में अब तक सिर्फ यही प्रावधान था कि वह किसी समूह को प्रतिबंधित कर सकता था, ऐसी कार्रवाई व्यक्तिगत तौर पर नहीं कर सकता। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

वहीं कुछ ऐसे न्यायिक फैसले आएं जिनमें प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े लोगों को सजा दिलाना एजेंसी के लिए काफी कठिन साबित हो रहा था। लेकिन इस संशोधन के बाद अब किसी को व्यक्तिगत तौर पर आतंकी घोषित किया जा सकेगा। संशोधित कानून के तहत संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को भी आतंकी घोषित किया जा सकेगा।

गौरतलब है कि आतंकवाद न सिर्फ भारत के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए शायद सबसे बड़े खतरों में से एक है, और इस लड़ाई को भारत पूरी दुनिया में लीड कर रहा है। लिहाजा ऐसे कानून पर कम से कम इंडियन को कोइ परेशानी नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसके बाद भी सरकार की मंशा पर सवला खड़े करते हुए विपक्ष ने विरोधी सुर उठाए हैं। लेकिन गृह मंत्री ने साफ किया है कि हमारा ऐसी कोई मंशा नहीं है।

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