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बंगाल में बाल-बाल बचे अमित शाह, जानिए किसने बचाई जान

नई दिल्ली: कोलकाता में मंगलवार को रोड शो के दौरान भड़की हिंसा के बाद बुधवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। मीडिया से बात करते हुए शाह ने हिंसा के लिए टीएमसी को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि अगर समय पर सीआरपीएफ नहीं पहुंचती तो मेरा बचना मुश्किल था।

उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव के छह चरण समाप्त हो चुके हैं, और इन सभी चरणों में सिवाय पश्चिम बंगाल के कहीं भी हिंसा नहीं हुई। इसका साफ मतलब है कि हिंसा का कारण सिर्फ ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस है। शाह ने कहा कि अगर हम (बीजेपी) हिंसा करना चाहते तो पूरे देश में हिंसा होती, देश के हर राज्य में हिंसा होती। लेकिन हिंसा सिर्फ बंगाल में हो रही है, इसलिए इसकी जिम्मेदार ममता बनर्जी व उनकी पार्टी टीएमसी है। शाह ने कहा कि मेरे रोड शो के दौरान तीन बार हमला किया गए। वहां हिंसा रोकने का कोई इंतजाम नहीं था।कल की घटना चिंताजनक है।

बता दें कि हिंसा के दौरान विद्यासागर कॉलेज में बनी ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा भी तोड़ दी गई। टीएमसी का आरोप है कि विद्यासागर की प्रतिमा बीजेपी समर्थकों ने तोड़ी है जबकि शाह का आरोप है कि विद्यासागर की प्रतिमा बीजेपी नहीं बल्कि टीएमसी समर्थकों ने तोड़ी है। शाह ने दावा किया हिंसा के दौरान कॉलेज का गेट बंद था तो मूर्ति किसने तोड़ी? अंदर कौन गया? हमारे कार्यकर्ता तो सड़क पर थे।

बता दें कि बंगाल में वोटिंग के दौरान संभावित हिंसा का अनुमान लगाते हुए चुनाव आयोग ने राज्य की 42 सीटों को सात चरणों में बांटा है। ताकि सभी पोलिंग बूथ पर सुरक्षा के कड़े इंतजान किए जा सके, लेकिन इसके बाद भी सभी चरण की वोटिंग में हिंसा का बोलबाला रहा है। बंगाल के राजनीतिक गुंडों के सामने आयोग की सारी व्यवस्था चरमारा सी गई है।

लोकसभा चुनाव 2019 के तहत अब तक छह चरण में राज्य की 33 सीटों के लिए वोटिंग हो चुकी है जबकि सातवें और आखिरी चरण में 9 सीटों पर वोटिंग होनी है। अब तक सभी छह चरण की वोटिंग के दौरान बंगाल में हिंसा का बोलबाला रहा। वहीं सातवें चरण की वोटिंग से पांच दिन पहले ही हिंसा का खतरनाक खेल चरम पर है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब बंगाल में हिंसा हुई है। बल्कि राज्य का राजनीतिक इतिहास ही रक्तरंजित रही है।

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