Breaking News
  • काबूल: PD6 इलाके में डिप्टी सीईओ के घर के पास कार धमाका, 10 लोगों के मारे जाने की खबर
  • सावन का तीसरा सोमवार आज, शिवालयों में भक्तों की लंबी कतार
  • आज शाम 7.30 बजे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का संबंधोन
  • इसरो के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर यूआर राव का निधन- पीएम मोदी ने जताया दुख
  • महिला विश्व कप 2017: फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड ने भारतीय टीम को 9 रनों से हराया

ऐसे ही बोलते रहे अमित शाह तो नरेंद्र मोदी नहीं रहेंगे PM !


हामारे देश भारत की पहचान दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के तौर पर की जाती है, लोकतंत्र में जनता अपने पसंद के उम्मीदवार को अपना नेतृत्व करने का मौका देती है,लेकिन कई बार जनता द्वारा चुके गए नेताओं पर सत्ता का सनक सवार हो जाता है, जिसके बाद उनका पतन तय होता है।

गौरतलब हो कि 2014 के लोकसभा चुनाव में गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी पर जनता ने आंख बंद करे भरोशा किया, क्योंकि जनता अपने नेतृत्व में बदलाव चाहती थी, लिहाजा मोदी ऐतिहासिक जनादेश के साथ केंद्र की सत्ता पर काबिज हुए। जनता मोदी से जो बदलाव चताहती है, पीएम मोदी उस दिशा मं तेजी से बढ़ रहे हैं, और देश को सातवें आसमान पर पहुंचाने कवायद में लगे हैं इसमे कोई दो मत नहीं है।

युधिष्ठिर के इस श्राप को आज तक भूगत रही है महिलाएं

लेकिन लोकतंत्र में सिर्फ पीएम मोदी के बेहतरीन प्रदर्शन और सफलता से कुछ नहीं होने वाला, क्योंकि अगर पीएम मोदी के बेहद करीबी लोग अगर अपने बयानों को ठिक ढंग से जनता के सामने नहीं रखते हैं तो वो दिन भी दूर नहीं जब पीएम मोदी की हाथ से भी सत्ता निकल जाएगी.

दरअसल हम ऐसी बात क्यों कह रहे हैं इसकी जानकारी आपको तब लगेगी जब आप इस पूरी रिपोर्ट को पढ़ेगे, जोकि मोदी के सबसे करीबी और दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के मुखिया अमित शाह से संबंधित है !

बीजेपी के अध्यक्ष हैं अमित शाह, पिछले दिनों दिनों के गोवा दौरे पर गए, जहां उन्होंने मोब लिंचिंग (भीड़ वाली हत्याएं) पर ऐसा बयान दिया है कि वो परेशान करने वाला है. हैरानी भी होती है. रामराज्य का ख्वाब दिखाने वाले ऐसा बयान कैसे दे सकते हैं?

इस पेड़ को कटते हुए देखने से भी नाराज होते हैं शनिदेव...

भीड़ कभी बीफ के नाम पर तो कभी बच्चा चुराने के नाम पर तो कभी किसी अफवाह में लोगों की जान ले रही है. इसमें सबसे ज्यादा मामले बीफ की अफवाहों को लेकर हैं. इन मौतों पर अमित शाह ने गोवा के एक कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी सरकार का बचाव किया और मीडिया पर निशाना साधा. अमित शाह ने कहा,

‘भीड़ द्वारा हत्या के सबसे ज्यादा मामले 2011 से 2013 के दौरान सामने आए. और तब केंद्र में कांग्रेस सरकार थी. तब इस तरह के सवाल नहीं उठाए गए.’

मीडिया से सवाल करते हुए अमित शाह बोले, ‘आपके पास एक भी ऐसी घटना नहीं है, जिसमें गिरफ़्तारी न हुई हो. हर मामले में दोषियों पर कार्रवाई हुई है.’

मोदी ने दी श्रद्धांजलि- भारत के इन जवानों ने हाइफा के लिए अपनी प्राणों की आहुति दे दी

एक के बाद एक कई बीफ की अफवाहों को लेकर भीड़ ने हत्याएं की हैं. 29 जून को ही झारखंड के रामगढ़ इलाके में मोहम्मद अलीमुद्दीन को भीड़ ने मार दिया. इन घटनाओं को लेकर ही सवाल पूछने पर अमित शाह ने मौतों का तुलनात्मक अध्ययन पेश किया.

अमित शाह का कहना था,

‘हाल में हुई घटनाओं की तुलना नहीं करना चाहता और न ही इनको कम करके आंकता हूं. मैं इस मामले में गंभीर हूं, लेकिन 2011, 2012 और 2013 में भीड़ द्वारा हत्या करने के सबसे ज्यादा मामले हुए.’ शाह ने कहा कि हमारी तीन साल की सरकार में जितनी लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं, उससे ज्यादा एक-एक साल में हुई है. मगर ये सवाल कभी नहीं उठा था.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने यह बातें गोवा में नगर निकायों और पंचायतों के प्रतिनिधियों के एक कार्यक्रम के दौरान कहीं. गोवा में बीफ बैन को लेकर भी उन्होंने जवाब दिया. किसी ने गोवा में बीफ को लेकर सवाल पूछ लिया तो अमित शाह बोले अच्छा मसला पूछ लिया, इसमें मीडिया के लिए रस है. शाह ने कहा, ‘गोवा में जहां तक बीफ पर प्रतिबंध की बात है, तो इसे लागू करने वाली भाजपा नहीं है. गोवा में पहले से गौहत्या पर पाबंदी है. यह साल 1976 से है और यह तब हुआ था, जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन किसी ने कांग्रेस से सवाल नहीं पूछा.’

भारत के इस खिलाड़ी को रिटायरमेंट के बाद world cup खेलने के लिए बुलाया गया था

अमित शाह के ये जवाब इस तरह के हैं, कि 84 में कहां थे. उस वक़्त कहां थे. उनके ये जवाब सुनकर ऐसा लगता है कि सवाल करना बंद कर दिया जाए. बस मीडिया उनका गुणगान करता रहे. कि रामराज्य आ रहा है. बीजेपी देश में बहार ला रही है. ‘क्या’, ‘क्यों’ और ‘कैसे’ शब्द उनके सामने नहीं दोहराए जाएं. जिस तरह से उन्होंने हत्याएं कर रही भीड़ पर जवाब दिया, उससे ऐसा मतलब निकलता है कि मीडिया को तब तक खामोश रहना चाहिए, जब तक उनके मुताबिक 2011, 12 और 13 से ज्यादा हत्याएं न हो जाएं. जब वो रिकॉर्ड टूट जाए. तब मीडिया सवाल उठाए. बाकी देश में बहार है.

जानिए 5000 साल पुराने इस कंकाल का चौंकाने वाला सच

शाह का ये जवाब तो अपनी नाकामी को छिपाने वाला लगता है. अमित शाह जी आपका जवाब ये होना चाहिए था. हम इससे निपटने के लिए करेंगे या कर रहे हैं न कि ये तब सवाल क्यों नहीं पूछे. अगर ऐसे तुलना करेंगे तो वो विकास, वो रामराज कहां और कैसे आएगा, जो आपने चुनावी रैलियों में लाने का वादा किया था.

इच बच्चे ने कहा- ‘डियर मिस्टर मोदी आई लव यू एंड योर पीपल इन इंडिया’ और फिर...

डेटा वेबसाइट इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट की माने, तो मौत के आंकडें चौंकाने वाले हैं. इसके मुताबिक 2010 से 2017 के बीच गाय के नाम पर हुई हिंसा में निशाने पर आए लोगों में से 57% मुस्लिम हैं. हिंसा की घटनाओं में मारे गए 86% मुस्लिम थे. आठ सालों में ऐसी 63 घटनाएं हुईं, जिनमें 28 लोगों की जान ले ली गई. गाय के नाम पर होने वाली हिंसा के 97% मामले 2014 में नई सरकार बनने के बाद हुए हैं. ये आंकड़े 25 जून 2017 तक हुई हिंसा पर आधारित हैं.

loading...