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500 और 1000 के नोटों की ‘घरवापसी’ पर एक बड़े अधिकारी का खुलासा!


नई दिल्ली: 2014 लोकसभा चुनाव के बाद ऐतिहासिक बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता पर काबिज होने वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कुछ सालों की सरकार में ही कई ऐतिहासिक फैसले लिए है। ऐसा ही एक फैसला मोदी ने काले धन पर नकेल कसने की दिशा में करते हुए 500 और 1000 के पुराने नोटों को बाजार से वापस लेने का फैसला किया है।

सरकार के इस फैलले के बाद देश से मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आ रही है। सरकार के इस फैसले से लोगों को काफी समस्यायों का सामन करना पड़ा है, हालांकि ज्यादातर लोगों का कहना है कि परेशानी तो हो रही है, लेकिन सरकार ने एक अहम कदम उठाया है।

तो वहीं सरकार के इस फैसले पर अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ यानी की एआईबीईए के एक बड़े अधिकारियों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि 500 और 1,000 रुपये के नोट वापस लेने से काले धन पर लगाम लगाने में कोई मदद नहीं मिलेगी।

अधिकारी के अनुसार काला धन तो विदेशी बैंकों, विदेशी मुद्रा, सोने या अन्य संपत्ति के रूप में जमा है। खबरों के अनुसार एआईबीईए  के महासचिव सी. एच. वेंकटचलम का कहना है कि यह हर कोई जानता है कि अधिकांश काला धन नकदी के रूप में नहीं बल्की अन्य दूसरे रूप में जमा है।

उन्होंने कहा कि काले धन पर नकेल कसने के लिए सिर्फ यह कदम काफी नहीं है। अधिकारी के अनुसार इस फैसले से नकली नोटों की समस्या भी दूर नहीं होगी। क्योंकि अब भी नकली नोट के सही कारणों का पता नहीं लगाया गया है, इस लिए अब नए नकली नोट फिर से आएंगे।

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