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नई दिल्ली: भारत-चीन के बीच सीमा पर जारी विवादों में पीएम मोदी के चीन दौरे से पहले थोड़ी नरमी दिखी थी, जिसका असर चीन में हुए तीन दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी दिखा, जहां चीनी राष्ट्रपति ने गर्मजोशी के साथ पीएम मोदी का स्वागत किया। अपने इस दौरे के दौरान पीएम मोदी ने कई कूटनीति उपलब्धियां हासिल की हैं।

बता दें कि भारत के लिए पीएम मोदी का चीन दौरे सबसे खास इसलिए भी है कि इस दौरान ब्रिक्स देशों ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में पहली बार पाकिस्तान के आतंकी समूहों का नाम शामिल किया है। जिससे आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान एक बार फिर से पूरी में नंगा हो गया है। हालांकि इसके बाद पाकिस्तान ने इस घोषणापत्र को भी खारिज कर दिया है, जिसमें ऐसी बाते कही थी।

आज आपके सामने पीएम के चीन दौरे के दौरान कुछ खास उपलब्धियां बताने जा रहे हैं।

शिखर सम्मेलन के दौरान चीन न अपनी मेजबानी में ब्रिक्स के मंच से आतंकवाद की पर चर्चा की है, जबकि इससे पहले कई ऐसे मौके आए जहां चीन आंख बंद कर पाकिस्तान का समर्थन करता दिखता रहा है।

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ब्रिक्स घोषणा पत्र में इस बार पाकिस्तान में फल फूल रहे आतंकी संगठनों लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद, तहरीक ए तालिबान और हिज्ब उत ताहिर का नाम शामिल करना ही पड़ा।

इस सम्मेलन में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों के साथ-साथ तालिबान, आईएसआईएस और अलकायदा का नाम लेकर उनकी निंदा की गई।

इससे पहले पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र ने भी जैश के प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया है। जिसपर चीन लगातार अड़गा लगाता रहा था, लेकिन इस बार उसकी एक न चली और उसे अपने रुख में बदलाव करना ही पड़ा।

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भारत-चीन के बीच डोकलाम विवाद की काफी चर्चा होती रही है, लेकिन इस दौरे के दौरान इस विवाद को भी सुलझाने पर सहमति बनी है। हालांकि इस दौरान खास तौर पर डोकलाम का नाम नहीं लिया गया लेकिन भारत और चीन ने सीमा पर शांति बहाली को लेकर सहमति जताई है।

चीन दौरे के दौरान डोकलाम विवाद के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता किया।

ब्रिक्स देशों ने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए चार समझौते पर हस्ताक्षर किए, इन सभी का उद्देश्य पांच देशों के समूह के भीतर व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के साथ सामरिक सहयोग को उच्च स्तर पर पहुंचाना है।

ब्रिक्स में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक विकास, क्षेत्रीय स्थिरता और पारस्परिक समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए 5 राष्ट्रों के समूह के बीच मजबूत भागीदारी की मांग की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत तेजी से दुनिया की सबसे खुली अर्थव्यवस्थाओं में बदल रहा है, उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों को शुरू किया गया है जो देश के आर्थिक परिदृश्य को बदल रहा है।

इसके अलावा उन्होंने जीएसटी का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में एक समान सेवाकर को भी लागू किया गया है जो भारत का सबसे बड़ा वित्तीय सुधार है।

इस दौरान पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत भी की और अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के तरीके पर चर्चा की।

ब्रिक्स के दौरान बैठक में दोनों नेताओं ने तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्र, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदानों में भी सहयोग पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति मिशेल टेदर से भी मुलाकात की और एक आम वैश्विक दृष्टि के आधार पर एक साझेदारी पर चर्चा की।

दोनों नेताओं ने गोवा में भारत द्वारा 2016  में आयोजित किए गए ब्रिक्स समिट के बाद पहली बार मुलाकात कील है। गौर हो कि भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय संबंधों को अब नए आयाम पर देखा जा रहा है।

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