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जल्द ही अयोध्या में विराजमान हो सकते है राम, SC का बड़ा फैसला

नई दिल्ली : पिछले कुछ दिनों से लगातार अयोध्या मामले में हो रहीं सुनवाई के बाद भी ऐसा लग रहा था कि जैसे अब यह मामला फिर अधर में अक जाएगा। क्योंकि पांच बेंचों के जज में अहम भूमिका निभाने वाले जज चीफ जस्टिश रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले है। जिससे ये कयास लगाया जाने लगा कि इनके रिटायरमेंट के बाद इस केस की सुनवाई फिर नये सिरे से होगी। जिससे यह मामला एकबार फिर अटक जाएगा।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद ये सभी कयास धूमिल नज़र आएं। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को जल्द से जल्द निपटाने के लिए अब सप्ताह में पांच दिन सुनवाई का दिन रखआ है। जिससे इस का निपटारा जल्द किया जा सकें। अमूमन ऐसे पुराने और विस्तृत केस की सुनवाई जरूरत वाले मामले में मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को ही सुने जाते हैं, पर अब कोर्ट का यह निर्णय इस केस पर जल्द परिणाम आने की ओर दर्शाता है। जिससे 491 साल पुराने मामले में जल्द ही अंतिम फैसला आने की उम्मीद बढ़ गई है।

6 अगस्त से शुरू हुई सुनवाई के तीसरे दिन भी रामलला विराजमान के वकील के परासरन ने जिरह जारी रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि, "इलाहाबाद हाई कोर्ट याचिका दायर करने में देरी के चलते निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड की अर्जी को खारिज कर चुका है। आदेश सिर्फ पूजा का अधिकार मांगने वाली गोपाल सिंह विशारद की याचिका पर आया था।"

इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि, "आपने मुकदमा भगवान की तरफ से दायर किया है। कानूनन मंदिर में स्थापित देवता को नाबालिग माना जाता है। उनके नाम से मुकदमा किया जा सकता है। लेकिन क्या जन्मस्थान को भी यही दर्जा दे सकते हैं?"

परासरन का जवाब था, "जिस किसी चीज को लोग पूजते हैं, उसे न्यायिक व्यक्ति का दर्जा दिया जा सकता है। जैसे सूर्य की पूजा होती है, ज़रूरत पड़ने पर उसे भी कोर्ट को व्यक्ति की तरह देखना होगा। इस पर आंशिक सहमति जताते हुए कोर्ट ने कहा, "उत्तराखंड हाई कोर्ट पहले गंगा नदी को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा देने वाला आदेश दे चुका है।

बता दें कि बुधवार को हुई सुनवाई में विवादित स्थान पर अधिकार मामले में निर्मोही अखाड़ा मंदिर पर अपने ऐतिहासिक कब्ज़े के पक्ष में कोई सबूत नहीं दे पाया था। जिसके बाद गुरूवार को आज उसके वकील ने किन्हीं 2 पुरानी चिट्ठियों की मौजूदगी का दावा किया। कोर्ट ने उनसे कल चिट्ठियां पेश करने के लिए कहा है।

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