Breaking News
  • नहाय खाय के साथ प्रकृति और सूर्य की उपासना का पर्व छठ पूजा शुरू
  • लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर आज वायु सेना का पहला अभ्यास
  • चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रपति XiJinping के अगले पांच सालों के कार्यकाल को सहमति दी
  • आज पूरा विश्व मना रहा है United Nations Day, प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1929 में हुआ था गठन

इन 5 कारणों की वजह से बीजेपी ने नायडू को चूना अपना उपराष्ट्रपति का उम्मीद्वार

NEW DELHI:- राष्ट्रपति चुनाव संपन्न होते ही उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर बीजेपी संसदीय दल की बैठक में मुहर लग गई है। पार्टी की ओर से केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू का नाम तय किया गया है। वहीं विपक्ष की ओर से गोपालकृष्ण गांधी को उम्मीदवार बनाया गया है। नायडू पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के भी भरोसेमंद हैं।

आखइर इस पद के लिए नायडू को ही क्यों चूना गया?

वेंकैया नायडू आंध्रप्रदेश से हैं। एनडीए राष्ट्रपति पद के लिए पहले ही उत्तर भारत से रामनाथ कोविंद ऐलान कर चुकी है। उम्मीद है कि वह राष्ट्रपति बन भी जाएंगे। पूरे देश में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश करने का प्लान कर रही बीजेपी के लिए ये एक मौका है। अगर बीजेपी दक्षिण का दांव चलती है तो 2019 के लिए भी एक रास्ता तैयार होगा।

वेंकैया नायडू चार बार राज्यसभा के सांसद रह चुके हैं। वह राजस्थान से सांसद हैं। बीजेपी के पास राज्यसभा में नंबर की भी कमी है, अगर राज्यसभा का कोई अनुभवी नेता इस पद पर चुना जाता है तो सदन चलाने के लिए आसानी होगी। नायडू पहली बार राज्यसभा के लिए 1998 में चुने गए थे इसके बाद से ही 2004, 2010 और 2016 में वह राज्यसभा के सांसद बने। इसके अलावा भी वेंकैया नायडू कई कमेटियों का हिस्सा रह चुके हैं।

संघ और बीजेपी के बीच हुई बैठक के बाद खबरें थे कि बीजेपी चाहती है कि कोई ऐसा चेहरा आगे आए जो संघ और बीजेपी की विचारधारा को समझता हो। नायडू 1975 के दौरान इमरजेंसी में जेल भी गए थे। 1977 से 1980 के बीच जनता पार्टी के समय में वे यूथ विंग के प्रेसिडेंट भी रहे। 1978 में वे विधायक भी चुने गए थे।

इसके अलावा नायडू पार्टी के कई अहम पदों पर भी रह चुके हैं, 1980 से 1983 के बीच नेशनल बीजेपी यूथ विंग के उपाध्यक्ष, आंध्र प्रदेश 1980 से 85 विधानसभा में बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष, 1988 से 1993 के बीच वह आंध्र प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष भी बने। 1993 से 2000 तक नायडू बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बने, 2002 में वे पहली बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। वे दिसंबर 2002 तक अध्यक्ष रहे। इसके बाद 2004 में दोबारा वे अध्यक्ष बने।

अप्रैल 2005 के बाद वे बीजेपी के सीनियर उपाध्यक्ष बनाए गए, 2006 के बाद वेंकैया को बीजेपी पार्लियामेंट्री बोर्ड का सदस्य और केंद्रीय चुनाव समिति का सदस्य बनाया गया।

पार्टी के साथ-साथ वेंकैया नायडू सरकार में भी बड़ा चेहरा हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बाद वेंकैया ही सबसे सीनियर मंत्री हैं। वेंकैया अटल सरकार के दौरान ग्रामीण विकास मंत्री थे, वहीं मोदी सरकार के दौरान उन्होंने शहरी विकास मंत्रालय की बागडोर संभाली। इसके अलावा नायडू ने संसदीय कार्यमंत्री, सूचना प्रसारण मंत्री का कार्यभार भी संभाला।

अगर बीजेपी नायडू का चेहरा आगे करती है तो राज्यसभा में कम संख्या होने के बावजूद भी वे स्थिति को संभालने में कारगर साबित होंगे। हालांकि मोदी के लिए उनके कैबिनेट में एक झटका होगा, क्योंकि तीन साल के कार्यकाल में कई मौकों पर नायडू पीएम मोदी के लिए विपक्ष को मुंहतोड़ जवाब देते नजर आए हैं।

loading...