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370 खत्म होने के बाद कैसा होगा जम्मू-कश्मीर, दिखेगा ऐसा नजारा

नई दिल्ली :  जम्मू-कश्मीर को लेकर बीते कई दिनों से जारी सियासी बंवडर ने सोमवार को उस वक्त विध्वंशक रूप ले लिया, जब अटकलों के बाजार पर विराम लगाते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर को लेकर संसद में अहम बिल पेश किया। जिसपर देखते ही देखते भारी हंगामा बरपा, लेकिन इसके बाद भी सरकार के इस फैसले से जम्मू-कश्मीर बड़े बदलाव की ओर बढ़ चला है। आइए हम कुछ ऐसे ही अहम बदलावों की बात करते हैं, जो सरकार के इस फैसले के बाद अमल में आ चुका है।

संसद में हंगामा नई बात नहीं है। बल्कि हर मुद्दे पर चर्चा से पहले उग्र हंगामा तो मानों संसद की पहचान बन गई है। लेकिन ये नजारा मोदी सरकार के उस ऐतिहासिक फैसले के बाद दिखा, जिसका इंतजार पूरे देश को था। सालों से जारी मांग और विरोध के बीच भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जम्मू-कश्मीर को लेकर प्रस्ताव पेश किया है, जिसके बाद से राज्य में पांच बड़े बदलाव होने जा रहे हैं।

1) जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे

2) लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश होगा लेकिन यहां विधानसभा नहीं होगी,

3) जबकि जम्मू-कश्मीर विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश होगा, जिसके पास अब विशेष राज्य का दर्जा  नहीं होगा।

4) अनुच्छेद 370 के खंड (1) को छोड़ कर इस धार के सभी प्रावधान खत्म

5) नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण, आर्थिक आधार पर  देने का प्रस्ताव लागू

जानिए कश्मीर में क्या होंगे बदलाव :-

  1. जम्मू-कश्मीर का अपना अलग संविधान नहीं होगा।
  2. अब भारत के संविधान के आधार पर ही चलेगा जम्मू-कश्मीर में शासन
  3. 1954 के जिस प्रावधान के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिला अब वो नहीं होगा
  4. अब भारतीय संविधान की सभी धाराएं जम्मू-कश्मीर में लागू होंगी।
  5. धारा 370 के कारण कश्मीर में अब तक जितने भी बदलाव हुए, वो सभी निरस्त कर दिया गया
  6. कश्मीर को मिले सभी विशेष अधिकार खत्म
  7. अब तक देश का कानून लागू करने के लिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा की मंजूरी अनिवार्य थी, लेकिन अब नहीं। अब केंद्र सरकार के फैसले सीधे-सीधे जम्मू-कश्मीर में लागू होंगे।

आजादी के 70 सालों के इतिहास में जम्मू-कश्मीर पर किसी भी सरकर द्वारा लिया गया सबसे बड़ा फैसला है। जिसे भारत सरकार कश्मीर के लिए लाभकारी मानती है, लेकिन सरकार की कुछ एक दो विरोधी पार्टियों को छोड़ सब ने इसका विरोध किया है। सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कांग्रेस के आजाद ने कड़े तेवर दिखाएं।

वहीं पहले से ही अंजाम भुगतने की चेतावनी दे रही पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती बवाल के शोले भड़काती दिख रही है।

पीडीपी की महबूबा के अलावा अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और बिहार में बीजेपी की सहयोगी जेडीयू ने भी सरकार के फैसले का विरोध किया है, लेकिन मोदी के धुरविरोधियों में से एक दिल्ली के सीएम और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने सरकार का समर्थन किया है। इसके आलावा वाइएसआर कांग्रेस और एआइडीएमके ने भी सरकार का समर्थन करते हुए इस फैसले को जम्मू-कश्नीर के उत्थान के लिए हितकारी माना है।

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