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अब बच्चे नहीं देख पाएंगे पॉर्न वीडियों, सरकार ने उठाया बड़ा कदम

NEW DELHI:- केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि पिछले महीने उसने चाइल्ड पॉर्नोग्राफीसे संबंधित 3,500 से अधिक वेबसाइटों को ब्लॉक किया, लेकिन उसे इन वेबसाइटों के कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए स्कूल बसों में जैमर लगाने से इनकार कर दिया।

अतिरिक्त महाधिवक्ता पिंकी आनंद ने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम.खानविलकर तथा न्यायमूर्ति मोहन एम.शांतनागोदर की पीठ से कहा कि केंद्र सरकार चाइल्ड पॉर्नोग्राफी वेबसाइटों को ब्लॉक करने के लिए विभिन्न तरह के कदम उठा रही है और सीबीएसई को स्कूलों में जैमर लगाने पर विचार करने के लिए कहा गया है।

जब उन्होंने कहा कि स्कूल बसों में जैमर लगाना संभव नहीं है, इस पर याचिकाकर्ता कमलेश वासवानी तथा सर्वोच्च न्यायालय महिला अधिवक्ता संघ ने कहा कि तो क्या आनंद वापस वही कहने जा रही हैं, जो केंद्र सरकार पहले कह चुकी है।

केंद्र सरकार ने जब कहा कि चाइल्ड पॉर्नोग्राफी पर लगाम लगाने के लिए उसने क्या-क्या कदम उठाए हैं, उसपर वह स्थिति रिपोर्ट दाखिल करेगी, तो न्यायालय ने उसे दो दिनों का वक्त दिया।

वासवानी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विजय पंजवानी ने कहा कि 3,500 वेबसाइटों को ब्लॉक करना कुछ नहीं है।

मामले की अगली सुनवाई के लिए न्यायालय ने 20 अगस्त की तारीख तय की है।

गौरतलब है कि 2013 में इस मामले में दाखिल अर्जी में कहा गया है कि इंटरनेट लॉ के अभाव में पॉर्न विडियो को बढ़ावा मिल रहा है। याचिकाकर्ता कमलेश वासवानी ने बताया कि मार्केट में 20 लाख पॉर्न विडियो उपलब्ध हैं और इंटरनेट से सीधे सीडी में इसे डाउनलोड किया जा सकता है। बच्चे आसानी से ये कंटेंट देख सकते हैं। इस कारण बच्चों के दिमाग पर इसका बुरा असर पड़ रहा है और पूरी सोसाइटी इस कारण खतरे में है।

शुरुआती याचिका चाइल्ड पॉर्नोग्रफी रोकने के लिए थी और बाद में तमाम तरह की पॉर्नोग्रफी ब्लॉक करने की गुहार इसमें जोड़ दी गई। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिया था कि पॉर्न साइट्स को ब्लॉक करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। 10 अक्टूबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा था कि उसने चाइल्ड पॉर्नोग्रफी से संबंधित सभी तरह की वेबसाइट्स को बैन कर दिया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने कहा था कि तमाम तरह के पॉर्न वेबसाइट्स को रोका जाना संभव नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी और मार्च 2016 में आदेश दिया था कि केंद्र सरकार की ओर से पेश अडिशनल सलिसिटर जनरल पिंकी आनंद इस मामले पर सरकार का रुख स्पष्ट करें। कोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा था कि निर्दोष बच्चे इसके लिए गुहार नहीं लगाएंगे और यह दुखद पहलू है। देश फ्रीडम ऑफ एक्स्प्रेशन के नाम पर बच्चों के साथ इस तरह के खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं कर सकता।

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