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हिंसक बंगाल में बमबारी, पेड़ से लटकी लाशों ने मचाई नई सनसनी

कोलकाता: हिंसक हिमाकत के लिए मशहूर बंगाल सियासी हिंसा का वो प्रयोगशाला बन चुका है, जहां इंनसानों की जिंदगी कोई मायने नहीं रखती। बर्चस्व की लड़ाई लड़ रही भाजपा और टीएमसी जय श्रीराम व जय महाकाली के बीच उलझी है, तो दोनो दलों के कार्यकर्ता एक दूसरे के खून के प्यासे दिख रहे हैं।

बंगाल में सियासी हिंसा की हालत ऐसी, जैसे सरकारी व्यवस्था दहशतगर्दों का गुलाम है। हर दिन हमले, कहीं बम धमाके तो कहीं दिन दहाड़े गोलियों की बौछार से पूरा बंगाल मातम में है। हालात इस करद खराब हो चुके हैं कि बंगाल हिंसा पर गृह मंत्रालय एडवाइजरी जारी कर रही है, बंगाल के बॉस दिल्ली में देश के बॉस से मिलते हैं, लेकिन हालत बद से बदतर होते जा रहे हैं।

दरअसल, बंगाल में जारी हिंसा के बीच बंगाल के राज्यपाल ने दिल्ली में पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की तो ऐसा लगा, अब बंगाल का बवाल अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन नहीं पहले से सुलग रही हिंसक आग मुलाकात के बाद बम धमाकों में तब्दिल हो गई। जारी हिंसक घटनाओं के बीच सोमवार रात उत्तर 24 परगना जिले के कांकीनारा में अज्ञात लोगों ने देसी बम धमाका कर दिया, जिसमें 2 लोगों की जान चली गई, जबकि अन्य 4 लोग जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

ताजा घटना से इलाके में दहशत का माहौल कायम है। लोग काफी डरे हुए हैं, क्योंकि सियासी गुंडे न सिर्फ जान लेने पर आमादा हैं, बल्कि इलाके में लूट की घटनाएं भी घट रही है और पुलिस मुकदरर्शक बनी है। सोमवार को हावड़ा के आमटा स्थित सरपोटा गांव में भी बीजेपी और आरएसएस कार्यकर्ताओं के पेड़ से लटके शव ने इलाके में सनसनी मचा दी, बीजेपी कार्यकर्ता समातुल दोलुई का शव पेड़ से लटका मिला, जिनके परिजनों का आरोप है कि इस घटना के पीछे तृणमूल कांग्रेस का हाथ है।

जबकि इससे पहले रविवार को आरएसएस कार्यकर्ता स्वदेश मन्ना का शव भी अतचटा गांव में एक पेड़ से लटका मिला था। आरोप है कि मन्ना ने कुछ दिनों पहले स्थानीय स्तर पर 'जय श्रीराम' रैली निकाली थी, जिससे नाराज टीएमसी कार्कर्ताओं ने उसकी बली दे दी। आपको बता दें कि बंगाल में सियासी हिंसा की परंपरा काफी पुरानी है। लेकिन हाल के दिनों में बंगाल की हिंसा हर दिन नये आयाम को छुती जा रही है। हालत ऐसे हो चले हैं कि सियासी गुडों ने सरकार की सारी व्यवस्थाओं को बंधक बना रखा है। इसे विडंवना नहीं तो और क्या कहेंगे कि क्रांतिकारियों की धरती बंगाल बेगुनाहों के खून से लाल है, और राजनीतिक धुरंधर इन धधकते चिताओं पर सियासी रोटियां सेक रहे हैं।

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