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पानी ही पानी : 150 लोगों की गई जान, मंत्री दे रहे है बयान, चारों तरफ त्राहिमाम

नोएडा : पानी का कोई रंग नहीं होता, लेकिन जब यह क्रूर रूप अख्तियार कर लेता हैं तो कई गांवों को जलमग्न और कई जीवन निगल लेता हैं। पर जब यहीं पानी अपनी बर्बादी को देखते हुए आग बबूला हो जाती हैं तो वह अपने आंचल को सिमट लेती है। जिससे पूरे धरती पर त्राहिमाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसलिए कहा जाता हैं न तो जल की अधिकता अच्छी होती हैं और न जल की कमी।

जल के संचयन को लेकर हमेशा सरकार और विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ता मुहिम चलाते हैं लेकिन सरकार सिर्फ मुहिम ही चलाती हैं कुछ करदती नहीं। जिस प्रकार सड़कों के निर्माण और बिल्डिंगों के लिए पेड़ों को काटा जा रहा है उससे पानी का क्षय होना जरूरी था। पर, न इस मामले में सरकार कोई कदम उठा सकीं और न आम जनता ही। देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने इस बारे में सोचा था लेकिन उनकी सोच को किसी सरकार ने अमल में नहीं लाया, चाहे वह कांग्रेस हो या बीजेपी। सरकार और जनता के इसी लापरवाही का नतीजा हैं कि आज देश में कहीं बाढ़ हैं तो कहीं सूखा।

असम और बिहार में इसी बाढ़ की चपेट में अबतक 150 लोगों की जान चली गई हैं। जिसके चपेट में 1 करोड़ 15 लाख से अधिक लोग प्रभावित है। और इस मामले में सरकार सिर्फ एक बयान जारी कर मृतकों को चार लाख रूपये मुआवजे देने की बात कर रहीं है। यानी कहा जाए तो जब सरकार के काम करने का समय होता हैं तो वो पैर पर पैर चढ़ाएं विश्राम करते हैं और जब किसी तरह की विपदा आती हैं तो वे सिनेमाघरों एवं विदेश यात्रा पर दिखते हैं।

आपको बता दें कि बिहार में सबसे अधिक बाढ़ से प्रभावित जिला सितामढ़ी है, जहां अब तक 27 लोगों की जान चली गई है। वहीं पूरे राज्य में बाढ़ से मरनेवाले लोगों की संख्या 78 हैं। जबकि असम मरनेवाले लोगों की संख्या 47 हो गई है। गौरतलब हैं कि असम के 33 में से 27 जिलों में 48.87 लाख लोग प्रभावित हैं। जबकि कई जानवर भी इस बाढ़ के कारण काल के गाल में समा चुके है। पर सरकार इस पूरे मामले में खामोश है।

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