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गरीब सवर्णों का 10 प्रतिशत आरक्षण पक्का, संसद के दोनों सदन में पास हुआ बिल, जानिए आगे क्या होगा

नई दिल्ली: आजद भारत के इतिहास में 9 जनवरी की तारीख दिन वाकई ऐतिहासिक दिन के तौर पर दर्ज हो चुकी है। आर्थिक आधर पर गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित संविधान संशोधन बिल देर शाम संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा से पास करा लिया गया।

इससे पहले मंगलवार को करीब पांच घंटे तक चली बहस के बाद बिल लोकसभा में पास हुआ था। जिसके बाद इसे संसद से अंतिम मंजूरी के लिए राज्यसभा में भेजा गया था। राज्यसभा से पास होने के बाद इस बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद बिल कानून के रूप में अमल मे लाया जाएगा।

यानी अब लगभग तय हो चुका है कि आर्थिक आधार पर कमजोर सवर्ण वर्ग के लोगों को सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थानों में 10 प्रतिशत का आरक्षण मिलेगा। सिर्फ राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी है और सरकार की चहलकदमी देखते हुए ऐसा लगता है जैसे राष्ट्रपति से भी जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी।

राज्यसभा वोटिंग के दौरान बिल के समर्थन में 165 वोट पड़े जबकि विपक्ष में मात्र सात वोट पड़े, जबकि बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजने के खिलाफ 155 वोट पड़े। आपको बता दें कि सदन में कुछ सदस्य बिल का समर्थन तो कर रहे थे, लेकिन वे इसपर विचार-विमर्स के लिए सेलेक्ट कमिटी के पास भेजना चाहते थे।

राज्यसभा के उपसभापति ने चर्चा को अंतिम रूप देते हुए बताया कि बिल पर चर्चा के लिए आठ घंटे का समय निर्धारित किया गया था, जबकि चर्ची करीब 10 घंटे तक चली। यहां एक और अहम जानकारी दे दें कि सवर्ण वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले से अन्य वर्ग के लोगों के आरक्षण पर कुछ असर नहीं होने की बात की जा रही है, क्योंकि ये आरक्षण मौजूदा 49.5 फीसदी आरक्षण की सीमा के ऊपर होगा।

आपको बता दें कि इससे पहले सोमवार को केंद्र की मोदी सरकार ने कैबिनेट बैठक के दौरान आर्थिक रुप से कमजोर सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव को मंजूरी गई थी। लेकिन संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण से संबंधित कोई प्रावधान नहीं है, लिहाजा इसके लिए संविधान संशोधन जरूरी था, जिसके लिए संसद की मंजूरी जरूरी थी, जो अब लगभग पूरी हो चुकी है।

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