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गरीब सवर्णों को जल्द से जल्द आरक्षण दिलाने के लिए मोदी सरकार ने उठाया बड़ा कदम!

नई दिल्ली: आगामी लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़ा दांव खेलते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने इस साल की पहली ही कैबिनेट बैठक में आर्थिक आधार पर कमजोर या गरीब सर्वणों के लिए आरक्षण का प्रस्ताव पारित कर दिया है। हालांकि संविधान में किसी भी वर्ग के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं होने के कारण सरकार को सबसे पहले संविधान में संशोधन कराना होगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्रीय कैबिनेट ने सोमवार को गरीब सर्वणों को 10 प्रतशित आरक्षण दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसके बाद मंगलवार को केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावरचंद्र गहलोत ने लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, जिसपर शाम पांच बजे चर्चा हो सकती है।

आपको बता दें कि ये संविधान का 124वां संशोधन है, लेकिन सरकार के लिए ये राह काफी मुश्किल दिख रही है। हालांकि सरकार ने बिल पास करवाने के लिए सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। बीजेपी ने लोकसभा में अपने सभी सांसदों को मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है, जबकि राज्यसभा का कार्यकाल भी एक दिन के लिए बढ़ा दिया गया है।

गौरतलब हो कि संविधान संशोधन बिल पास कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। ऐसे में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने भी इस बिल को समर्थन देने की बात कही है। अगर सचमुच कांग्रेस और आप इस मसले पर सरकार के साथ खड़ी है तो लोकसभा में इस बिल के लिए कोई बाध नही है, लेकिन राज्यसभा में बिल अटक सकता है।

दरअसल, आकड़ों के लिहाज से देखें तो, लोकसभा में कुल सीटें 543 हैं और बिल पास कराने के लिए 349 वोटों की जरूरत है। बीजेपी की नेतृत्व वाली एनडीए के पास लोकसभा में 303 सांसद हैं, वहीं अगर कांग्रेस के 45 और आम आदमी पार्टी के 4 सांसदों का समर्थन मिलता है तो यह आकड़ा 352 तक पहुंच जाता है, जबकि जरूरत सिर्फ 349 सांसदों की ही है। इस तरह से लोकसभा में बिल पास हो सकता है।

लेकिन राज्यसभा की बात करें तो यहां कुल सीटें 244 है और बिल पास कराने कि लिए 163 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। जबकि राज्यसभा में एनडीए के पास 92 सीटें हैं, वहीं अगर कांग्रेस की 50 और आप के 3 सदस्य यहां भी समर्थन देते हैं तो यह आकड़ा 145 तक पहुंचता है, जो जरूरी नंबर के अनुसार 18 कम है।

ऐसे में यहां सपा और बसपा समेत अन्य सदस्यों का समर्थन भी जरूरी है, लिहाजा राज्यसभा में बिल अटकता दिख रहा है, इतना ही नहीं इस बिल को पास कराने के लिए 50 प्रतिशत राज्य विधानसभाओं की भी सहमति जरूरी है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल बिल के भविष्य के बारे में कुछ अधिक नहीं कर सकते।

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