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GDP और बेरोजगारी को लेकर शिवसेना ने किया बीजेपी पर बड़ा हमला, कहा विज्ञापनबाजी न करें...

मुंबई : लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी की जमकर तारीफ करने वाले उनके सहयोगी पार्टी शिवसेना एकबार फिर बीजेपी को आड़े हाथों ले रही है। जिसमें उन्होंने बीजेपी पर काम न करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी काम के बजाय विज्ञापन पर ध्यान दे रहीं है, इसलिए वो विज्ञापनबाजी न करें औऱ काम पर ध्यान दें। आपको बता दें कि शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए बीजेपी पर यह आरोप लगाया है। सामना में शिवसेना ने बीजेपी को जीडीपी और बेरोजगारी मुद्दे पर भी जमकर घेरा है।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है, ‘’दिल्ली में नई सरकार के काम में जुटने का दृश्य तैयार हो गया है। उस दृश्य पर चुनौती के काले धब्बे स्पष्ट दिखने लगे हैं। देश की आर्थिक स्थिति स्पष्ट रूप से बिगड़ी हुई नजर आ रही है। आसमान फटा हुआ है इसलिए सिलाई भी कहां करें, ऐसी अवस्था हो गई है। मोदी की सरकार आ रही है इस सुगबुगाहट के साथ ही सट्टा बाजार और शेयर बाजार मचल उठा लेकिन ‘जीडीपी’ गिर पड़ी और बेरोजगारी का ग्राफ बढ़ गया ये कोई अच्छे संकेत नहीं हैं।’’

सामने में आगे लिखा हैं, ‘’बेरोजगारी का संकट ऐसे ही बढ़ता रहा तो क्या करना होगा? इस पर सिर्फ चर्चा करके और विज्ञापनबाजी करके कुछ नहीं होगा। देश में बेरोजगारी की ज्वाला भड़क उठी है। ‘नेशनल सेंपल सर्वे’ के आंकड़ों के अनुसार 2017-18 में बेरोजगारी की दर 6.1 प्रतिशत पहुंच गई। पिछले 45 सालों का यह सर्वोच्च आंकड़ा है। केंद्रीय श्रमिक मंत्रालय ने भी इस पर अब मुहर लगा दी है। सरकार का कहना ऐसा है कि बेरोजगारी बढ़ रही है यह कोई हमारा पाप नहीं है। बेरोजगारी की समस्या कोई पिछले 5 सालों में बीजेपी ने तैयार नहीं की है।’’

शिवसेना ने कहा कि, ‘’हर साल दो करोड़ रोजगार देने का आश्वासन था और उस हिसाब से पिछले 5 सालों में कम-से-कम 10 करोड़ रोजगार का लक्ष्य पार करना चाहिए था, जो होता दिख नहीं रहा है और उसकी जिम्मेदारी नेहरू-गांधी परिवार पर नहीं डाली जा सकती। सच्चाई ऐसी है कि रोजगार निर्माण निरंतर घट रहा है।’’

सामना में लिखा है, ‘’देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है. ऐसा सरकार कहती है लेकिन विकास दर घट रही है और बेरोजगारी बढ़ रही है ये भी उतना ही सच है. नए उद्योग, बंदरगाह, सड़क, हवाई अड्डे, यातायात जैसे क्षेत्रों में निवेश हुआ तो ही रोजगार का निर्माण होगा और जीडीपी बढ़ेगी. देश में बुलेट ट्रेन आ रही है, उसमें एक व्यक्ति को भी रोजगार नहीं मिलेगा. राफेल उद्योग में भी रोजगार का बड़ा मौका नहीं है.’’

सामना में आगे लिखा है, ‘’चीन में काम करनेवाली 300 अमेरिकी कंपनियां वहां से बोरिया-बिस्तर लपेटकर हिंदुस्तान आ रही हैं, ऐसी तस्वीर चुनाव पूर्व दिखाई गई थी। मगर अब अमेरिका के राष्ट्राध्यक्ष ट्रंप ने हिंदुस्तान पर व्यापारिक प्रतिबंध लाद दिया है। महंगाई, बेरोजगारी, घटता उत्पादन और बंद होते उद्योग जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। शब्द भ्रम का खेल खेलने से बेरोजगारी नहीं हटेगी। अर्थव्यवस्था संकट में है।’’

आपको बता दें कि शिवसेना का यह आरोप निराधार नहीं है। पीएम मोदी के पहले शासनकाल में वैकेंसी इतनी कम थी कि बेरोजगारों की संख्या में इजाफा होना जायज है। और जहां रहीं जीडीपी की बात तो प्रोडक्शन कम होने एवं निवेश न के बराबर होने और पुराने कल-कारखानें के ठप होने से जीडीपी पर काफी खासा असर पड़ा है। औऱ जहां रहीं शिवसेना के इस राग छेड़ने की बात तो बता दें कि अगले तीन से चार माह में ही मुंबई में चुनाव होने है। जिस पर बीजेपी औऱ शिवसेना साथ मिलकर लड़ रहे है। दोनों पार्टियां संयुक्त रूप से 135-135 सीटों पर चुनाव लड़ रहे है। वहीं अन्य सहयोगी दल 18 सीटों पर लड़ेगी। शिवसेना की यह इच्छा होगी कि वह बीजेपी से अधिक सीट लाकर मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पेश कर सकें। अब देखना यह है कि शिवसेना के इस आरोप पर बीजेपी क्या कदम उठाती है। क्या वह आरोप प्रत्यारोप का गेम खेलेगी या वह जीडीपी औऱ रोजगार में इजाफा कर शिवसेना को मुहतोड़ जवाब देगी।

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