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साध्वी के चुनाव लड़ने में समस्या नहीं, एनआईए कोर्ट से आई बड़ी राहत

नई दिल्ली: मालेगांव बम धमाकों की नंबर एक आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। एनआई कोर्ट ने साध्वी को चुनाव लड़ने से रोकने के संबंध में दायर की गई याचिका खारिज दी है, जिसके बाद अब आतंकवाद की आरोपी साध्वी प्रज्ञा के चुनाव लड़ने पर जारी असमंजस की स्थिति खत्म होती दिख रही है।

दरअसल, मालेगांव बम धमाकों की आरोपी साध्वी प्रज्ञा को भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश के भोपाल लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा है। यहां प्रज्ञा का मुकाबला वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिगविजय सिंह से हैं। जिन्होंने साध्वी को आधार बनाते हुए ‘भगवा आतंकवाद’ का नारा बुलंद किया था।

वहीं अब साध्वी इसी ‘भगव आतंवाद’ को मुद्दा बनाकर चुनावी मैदान में विजयी पकता फहराना चाहती हैं। मालेगांव बम धमाकों में जमानत पर चल रही साध्वी प्रज्ञा ने भोपाल से अपनी दावेदारी पेश करते हुए नामांकन भी दाखिल कर दिया है। लेकिन उनकी जमात रद्द और चुनाव लड़ने से रोकने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की गई। जिसके कारण साध्वी की दावेदारी अधर में दिख रही थी।

हालांकि साध्वी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुंबई की एनआईए कोर्ट के जज ने कहा कि दायर याचिका में शिकायतकर्ता ने अपना हस्ताक्षर ही नहीं किया है। शिकायतकर्ता की ओर से दलील दे रहे वकील ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा को स्वास्थ्य के आधार पर जमानत दी गई है, लेकिन वह टीवी पर इंटरव्यू दे रही है। उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने इलाज के बारे में भी दावा किया है।

जिसपर साध्वी के वकील जेपी मिश्रा ने कहा कि उनकी मुवक्किल इलाज करा रही हैं और उनकी स्थिति में सुधार हुआ है। उनके साथ हमेशा एक डॉक्टर रहता है। उन्होंने कहा कि, वह विचारधारा और देश के आधार पर चुनाव लड़ रही हैं। वह यह साबित करना चाहती है कि भगवा आतंकवाद जैसा कुछ भी नहीं है। इसलिए वह चुनाव लड़ रही हैं।

आपको बता दें कि चुनावी मैदान में उतरी साध्वी का साफ मानना है कि भगवा को न्याय और सम्मान दिलाने के लिए चुनाव लड़ रही हैं और न्याय दिलकर रहेगी। जानकारी के लिए बता दें कि साध्वी प्रज्ञा महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव में 29 सितंबर, 2008 को हुए धमाका मामले में मुख्य आरोपी हैं। इस धमाके में छह लोग मारे गए थे जबकि 100 से अधिक घायल हुए थे।

मामले की जांच कर रही एटीएस की टीम ने साध्वी पर मकोका समेत अन्य कई गंभीर धाराओं में आरोपी बनाते हुए चार्जशीट तैयार की थी, लेकिन एनआइए की जांच में साध्वी प्रज्ञा को क्लीनचिट मिल गई। उनके उपर से कानून की गंभीर धाराएं भी हटा ली गई। जिसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जेल में रहने में असमर्थता जताईं, जिसके आधार पर उन्हें जमानत मिली है।

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