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बंद दरवाजे के पीछे संयुक्त राष्ट्र की बैठक, होगी चर्चा...

नोएडा : अगस्त क्रांति के पांचवें दिन जम्मू-कश्मीर पर लिया गया भारत सरकार का फैसला पाकिस्तान के लिए गले की फांस बना है। उसे पता नहीं चल रहा कि आगे क्या करना है। अनुच्छेद 370 के मसले पर विश्व बिरादरी के सामने पाकिस्तान का रोना-धोना जारी है। लेकिन घड़ियाली आंसू बहा रहें पाकिस्तान की दलील कोई सुनने को राजी नहीं है। यहां तक की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के भी लगभग सभी देशों ने पाकिस्तान को बैरंग लौटा दिया।

अब पाकिस्तानी का एक मात्र सहारा चीन है, जिसके गिड़गिड़ाने पर संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे पर शुक्रवार को बैठक निर्धारित की गई है। हालांकि इसमें चीन की मजबूरी है, क्योंकि पाकिस्तान में चीन का बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है। यहीं कारण है पाकिस्तान के कहने पर चीन संयुक्त राष्ट्र में गिड़गिड़ा रहा है, जिसपर शुक्रवार को बैठक है। लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात है कि संयुक्त राष्ट्र जैसी मुखिया संस्था को बंद दरवाजे के पीछे बैठक करनी पड़े लेकिन पाकिस्तान के इशारे पर चीन जो न कराएं। संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में यह दूसरा मौका है जब कश्मीर मुद्दे पर कोई बैठक होने जा रही है।

हालांकि दूसरी बैठक 1971 की पहली बैठक से कई मायनों में भिन्न है। पहली बैठक न तो बंद दरवाजे के पीछे थी और न ही सुरक्षा परिषद् के अधिकांश सदस्य देशों ने पाकिस्तान का समर्थन करने से मना किया था। आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें 5 स्थाई और 10 अस्थाई हैं। अस्थाई सदस्यों का कार्यकाल कुछ वर्षों के लिए होता है जबकि स्थाई सदस्य हमेशा के लिए होते हैं।

स्थाई सदस्यों में अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस शामिल हैं। अस्थाई देशों में बेल्जियम, कोट डीवोएर, डोमिनिक रिपब्लिक, इक्वेटोरियल गुएनी, जर्मनी, इंडोनेशिया, कुवैत, पेरू, पोलैंड और साउथ अफ्रीका जैसे देश हैं। स्थाई सदस्यों में चीन को छोड़ दें तो बाकी के देशों-फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका ने पाकिस्तान को ठेंगा दिखा दिया है। इनका स्पष्ट कहना है कि कश्मीर मुद्दा हिंदुस्तान और पाकिस्तान का आंतरिक मसला है, इसलिए दोनों देश मिलकर निपटें, किसी तीसरे पक्ष की इसमें दरकार नहीं।

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