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करतारपुर कॉरिडोर का श्रेय लेनेवाले पाकिस्तान में तोड़ा गया ऐतिहासिक ‘गुरू नानक’ का महल

नई दिल्ली : भारत सरकार के पहल पर पाकिस्तान द्वारा सिखों के लिए शुरू किया गया करतारपुर कॉरिडोर अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ था कि पाकिस्तान ने एक बार फिर दिखा दिया कि वो किस हद तक जा सकता है। वो अपनी नापाक हरकत भारतीय सीमा बॉर्डर हो या पाकिस्तान के अंदर सिखों या हिंदुओं का धार्मिक स्थल पर भी जारी रखेगा। आपने ऐसे कई खबरें भी पढ़ी होंगी जहां पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया जाता है। उनके बहू-बेटियों के अस्मत को खिलौना समझा जाता है, जिसे मन आता है वह खेलकर चला जाता है। पाकिस्तान सरकार हो या पाकिस्तानी प्रशासन सभी इस अवस्था पर मौन रहते है। और वे भी गैर मुस्लिम धर्म के लोगों कि स्थिति पर मंद-मंद मुस्कुराते रहते है। उन्हें जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया जाता है और घर में रखैल के तौर पर रखा जाता है।

वहीं पाकिस्तान हमेशा विश्व मंच पर अपने पाक छवि को दिखाने की कोशिश करता है। इसी पाक छवि को दिखाने के लिए पाक ने भारतीय सिखों के लिए फारत सरकार की पहल पर करतारपुर कॉरिडोर की शुरूआत की। जिसका श्रेय कांग्रेस एवं क्रिकेट से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू ले रहे थे। लेकिन एक बार फिर पाकिस्तान ने यह दिखा दिया कि वो एक दो मुंहा सांप है। अपने इसी लक्षण से ग्रसित पाकिस्तान ने पंजाब के उस ऐतिहासिक महल में तोड़ फोड़ किया जो सिखों के प्रथम गुरू गुरू नानक का महल था। जहां सिर्फ तोड़ फोड़ ही नहीं बल्कि महल को भी तोड़ कर क्षति पहुंचाया गया। पंजाब का ये हिस्सा वो हिस्सा है जो भारत और पाकिस्तान के विभाजन के दौरान पाकिस्तान में चला गया था। विभाजन के समय जो रेखा उस समय के सरकार के सामने खिंचा गया था, वह आज भी वहां के आवामों के दिल में टीस की तरह है। जो हमेशा के लिए दिल में घर कर गया है। और पाकिस्तान हमेशा उस टीस के साथ छेड़छाड़ कर घाव को और ताजा कर देता है।

पाकिस्तान के स्थानीय अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार इस चार मंजिला इमारत की दीवारों पर सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक के अलावा हिंदू शासकों और राजकुमारों की तस्वीरें थीं। जो तकरीबन चार सदी पहले बनाया गया था और भारत समेत दुनियाभर से सिख समुदाय के लोग इसे देखने आया करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर से करीब 100 किलोमीटर दूर नारोवाल शहर में बने इस गुरु नानक महल में 16 कमरे थे और हर कमरे में कम से कम 3 दरवाजे और कम से कम 4 रोशनदान थे। हैरान करने वाली बात यह है जिस महल के तोड़े जाने की चर्चा पूरे पाकिस्तान में आग की तरह फैली हुई थी, जिसकी भनक वहां के स्थानीय प्राधिकरण और उसके अधिकारियों को नहीं थी। इस महल का मालिक कौन है इसे लेकर कोई जानकारी नहीं हैं।   

इस घटना पर स्थानीय निवासी मोहम्मद असलम ने कहा, ‘इस पुरानी इमारत को बाबा गुरु नानक महल कहा जाता है और हमने उसे महलां नाम दिया है। भारत समेत दुनियाभर से सिख यहां आया करते थे।’ वहीं एक अन्य स्थानीय निवासी मोहम्मद अशरफ ने कहा, ‘औकाफ विभाग को इस बारे में बताया गया कि कुछ प्रभावशाली लोग इमारत में तोड़ फोड़ कर रहे हैं लेकिन किसी भी अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की और न ही कोई यहां पहुंचा। प्रभावशाली लोगों ने औकाफ विभाग की मौन सहमति से इमारत को तोड़ दिया और उसकी कीमती खिड़कियां, दरवाजे, रोशनदान और लकड़ियां बेच दीं।’

डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) के उपायुक्त से लेकर इमारत में रहने वाले परिवार तक कई लोगों से बात करने की कोशिश की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि इमारत की कानूनी स्थिति क्या है, इसका मालिक कौन है और कौन सी सरकारी एजेंसी इसका रिकॉर्ड रखती है, लेकिन समाचार पत्र को कोई जानकारी नहीं मिल सकी। वहीं इस मामले को लेकर नरोवाल के उपायुक्त वहीद असगर ने कहा, ‘राजस्व रिकॉर्ड में इस इमारत का कोई जिक्र नहीं है।

ईटीपीबी सियालकोट क्षेत्र के ‘रेंट कलेक्टर’ राणा वहीद ने कहा, ‘हमारी टीम गुरु नानक महल बाटनवाला के संबंध में जांच कर रही है। यह संपत्ति ईटीपीबी की है तो इसमें तोड़-फोड़ करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस तोड़फोड़ को लेकर इलाके के लोगों ने प्रधानमंत्री इमरान खान से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

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