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ऐसा है पाकिस्तान-इस्राइल का संबंध- “यह पासपोर्ट इसराइल को छोड़कर सभी देशों में मान्य है”


नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दोनों के इस्राइल यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। मोदी देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जो इस्राइल के आधिकारिक यात्रा कर रहे हैं। अपनी यात्रा से पहले पीएम मोदी ने कहा कि वह इस्राइल दौरे के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से आतंकवाद जैसी समान चुनौतियों पर चर्चा करने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच आथर्कि संबंधों को मजबूत करने के रास्तों पर चर्चा करेंगे।

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लेकिन क्या आप इस बात को जानते हैं कि मोदी जिस देश की ऐतिहासिक यात्रा करने वाले हैं, उस देश का पाकिस्तान से कैसा संबंध हैं। इस्राइल एक छोटा सा देश जरूर है लेकिन किसी भी मायने में किसी बड़े देश के कम नहीं है। अपने उपर आंख दिखाने वालों को करारा जवाब देने वाले इस्राइल में पाकिस्तानियों का प्रवेश निषेध है।

आतंक का एक बड़े दुश्म के तौर पर अपनी पहचान रखने वाला देश इस्राइल ने आतंक के खात्में के लिए ऐसे-ऐसे उदाहरण पेश किए है कि पूरी दुनिया के लिए मिसाल है। इस देश के चारों ओर दुश्मन ही दुश्मन है जो किसी भी तरह से इजरायल को बर्बाद करना चाहते हैं, लेकिन आज के समय में इजरायल इतना ताकतवर देश है कि उससे टकराना तो दूर उसकी तरफ कोई तीखी नजरों से भी नहीं देख सकता।

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कहा जाता है कि इसराइल के लोग और वहां की सरकार पाकिस्तान से इतनी नफरत करते हैं कि पाकिस्तानी पासपोर्ट पर साफ शब्दों में लिखा होता है, “यह पासपोर्ट इसराइल को छोड़कर सभी देशों में मान्य है”।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 1948 में जब  इजराइल के प्रधानमंत्री डेविड-बेन-गुरियन ने अपने देश को UN में शामिल कराने के लिए पाकिस्तान से समर्थन मांगा इसके लिए डेविड-बेन ने आजाद पाक के मुहम्मद अली जिन्ना से संपर्क साधा लेकिन उन्होंने चुप्‍पी साध ली। हालांकि इसके बाद भी इजराइल, पाकिस्‍तान के साथ बेहतर संबंध चाहता था, लेकिन पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री सर जफरुल्ला खान ने 1952 में अरब के देशो में एकता और इजराइल के खिलाफ अपनी कट्टरपंथी नीतियों को समर्थन दिया जो इजराइल को बीलकुल पसंद नहीं आई।

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