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नेपाल: पीएम नरेंद्र मोदी ने लोगों ने क्यों मांगी माफ़ी कहा...

काठमांडू: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय दौरे पर नेपाल पहुंचे हुए हैं। शुक्रवार को नेपाल पहुंचे पर पीएम नरेंद्र मोदी ने माता जानकी के मायके जनकपुर के मंदिर में पूजा अर्चना की। इसके बाद भारत और नेपाल के बीच बस को हरी झंडी दिखाई। इस दौरन नेपाली पीएम केपी ओली भी मौजूद रहे।

बतादें कि भारत और नेपाल के रिश्तों में आई दरार को पाटने के पीएम नरेंद्र मोदी मोदी ने राम जानकी का सहारा लिया है। शुक्रवार को जनकपुर पहुंचने पर पीएम नरेंद्र मोदी ने माता जानकी के मंदिर में पूजा अर्चना की। इस दौरान उन्हें साथ ही नेपाली पीएम केपी ओली भी रहे। वहीँ मंदिर में दर्शन के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने अयोध्या और जनकपुर के बीच चलने वाली बस को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि, नेपाल के बिना हमारे धाम अधूरे हैं, हमारे राम अधूरे हैं।

शुक्रवार को जानकी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद पीएम नरेंद्र मोदी आयोजित विशेष कीर्तन में भी शामिल हुए। इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने जनता को संबोधित किया। उनके संबोधन की शुरुआत 'जय सिया राम' के उद्घोष से हुई। मोदी ने कहा कि, मैं अगस्त 2014 में पहली बार नेपाल आया था, तब मैंने कहा था कि जल्द ही मैं जनकपुर आऊंगा। लेकिन तुरंत नहीं सका, देरी से आने के लिए माफी मांगता हूं। यहां आने की मेरी पुरानी इच्छा थी। मोदी ने कहा कि में सौभाग्यशाली हूँ कि एकादशी के दिन मैया सीता ने मुझे यहां बुलाया है।

मोदी ने कहा कि, भारत-नेपाल के बीच युगों से दोस्ती है, राजा जनक और दशरथ ने दोनों को मित्र बनाया। महाभारत में विराटनगर, रामायण में जनकपुर, बुद्ध काल में लुम्बिनी का ये संबंध युगों-युगों से चलता आ रहा है। आगे पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि, 'एकादशी के पावन पर्व पर माता जानकी के चरणों में आने का सौभाग्य मिला।

साथ ही उन्होंने कहा कि, ‘यह भी ऐतिहासिक पल है कि नेपाल के आदरणीय प्रधानमंत्री और मेरे भाई साहब केपी शर्मा ओली स्वयं काठमांडू से यहां आए। पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा नेपाली पीएम केपी ओली को दो बार भाई संबोधित किया। जिसका सीधा मतलब निकाला जा सकता है कि मोदी नेपाल के साथ रिश्ते बेहतर करने की कोशिश में जुटे हैं। जहाँ पहले से कई मुद्दों को लेकर भारत ओए नेपाल में दरार आई हुई है। साथ ही नेपाल का झुकाव चीन की ओर होना अभी भारत के लिए खतरे की घंटी है।     

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