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पाकिस्तान ने नहीं दिया कुलभूषण को अधिकार, फिर भी हार गया पाकिस्तान

नोएडा : जीत, बहुत बड़ी जीत, हां हां ये बहुत बड़ी जीत है, तो क्या है ये बड़ी जीत, ये कोई एक जीत नहीं बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत की जीत की लंबी फेहरिस्त का एक हिस्सा है।14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंवादी हमले के बाद पीएम मोदी ने पाकिस्तान को खुले तौर पर चेतावनी दी थी, जिसके बाद से आतंक प्रिय पाकिस्तान पर भारत का दबाव बढ़ता ही गया और आज हालात ऐसे हो चले हैं कि पाकिस्तान की सांसे हल्क में अटकी है, भारत को जंग के लिए उकसाने वाला पाकिस्तान अपने आप से जंग लड़ रहा है। पुलवामा हमले के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक हो या खूंखार आतंकवादी मसूद अजहर का वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जाना, हाल के दिनों में पाकिस्तान को कई झटके लगे हैं, वहीं 17 जुलाई को तो पाकिस्तान परास्त हो गया, जब एक ही दिन डबल झटका लगा।

दुनियाभर में पाकिस्तान को बेनकाब करने की उस कोशिश में नये पंख लग गए है, जिसके तहत भारत पाकिस्तान को बेनकाब करता रहा है। 17 जुलाई को पाकिस्तान को दो बार मुंह की खानी पड़ी। एक ओर हेग की इंटरनेशनल अदालत ने पाकिस्तान पर कई संगिन तोहमत जड़े तो दूसरी ओर भारत को खून के आंसू रूलाने वाले दुनिया के खूंखार आतंकी हाफिज सईद को गिरफ्तार किए जाने ख़बर आईं। हाफिज की गिरफ्तारी न सिर्फ भारत के लिए बल्कि दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में से एक अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए भी खास रहा।

इससे पहले ये समझना होगा कि आखिर हाफिज है कौन? हाफिज भारत को खून के आंसू रूलाने वाला है, इसने भारत को कई बार खून के आंसू रूलाए। 2008 में मुंबई हमला हो या उरी का दर्दनाक मंजर या फिर पुलवामा में सुरक्षा बलों पर हुआ अब तक सबसे बड़ा आतंकी हमला, सब में इस हफिज सईद की संलिप्तता रही है। लेकिन पाकिस्तान के लिए मेहमान है। खुलेआम घुमता है, सरेआम जहर उगलता है हाफिज, लेकिन पाकिस्तानी हुक्मरानों के लिए हफिज साहेब, आका, आकंत का आका और न जाने कौन-कौन से खूंखार नामों से जाना जाता है, लेकिन आज हालत ऐसे हो चुके हैं कि मेहमान की ससुराल में ही बेइज्जती हो रही है।

दरअसल भारत और वैश्विक दबाव में आए पाकिस्तान ने हाफिज को गिरफ्तार किए जाने की जैसे ही जानकारी दी, भारत समेत दुनिया भर में हलचल मचा दी, भारत सरकार के नुमाइंदे इसे सरकार की बड़ी कुटनीतिक जीत मानते हैं। जिसके सहारे पाकिस्तान को बेनकाब करना अब और आसान हो गया है। लेकिन यहां ज्यादा खुश की होने की जरूर नहीं क्योंकि ये पाकिस्तान की नापाक चाल भी हो सकती है। जो वह दुनिया की आंख में धुल झोंकने के लिए चलता रहा है।

आपको बता दें पहली नजर में ये यकीन कर पाना भी मुश्किल हो सकता है कि पाकिस्तान अपने पाले-पोशे आतंवदियों पर कार्रवाई कर रहा है, क्योंकि ये वही हफिज सईद है, जो पाकिस्तानी प्रधानमंत्रियों को अपना पालतू समझता रहा है, जिसका पाकिस्तानी सेना पर भी दबदबा रहा है। दावा किया जाता है कि पाकिस्तान की सेना और सरकार, हाफिज को अंदर ही अंदर भारत में दहशतर्दी के लिए चंदा मुहैया कराता रहा है लेकिन आज हालत ऐसे हैं कि आतंक के लिए चंदा बटोरने वाला खुद चंदा बनकर रह रह गया है।

पाकिस्तान द्वारा आनन-फानन में की गई हाफिज की गिरफ्तारी असल में आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की एक जुगाड़ है। क्योंकि आतंक प्रिय पाकिस्तान पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की तलवार लटक रही है, जिससे जान बचाने के लिए आतंक परस्त पाकिस्तान न चाहते हुए भी आतंकवादियों के खिलाफ एक्शन लेने पर मजबूर है।

हाफिज की गिरफ्तारी पर न सिर्फ भारत के लिए बल्कि दुनिया के लिए एक बड़ी खबर है। जिसपर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्वीट किया, '10 साल की खोजबीन के बाद, आखिरकार मुंबई आतंकी हमलों के 'मास्टरमाइंड' को पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया है। पिछले 2 सालों में उसे पकड़ने के लिए बहुत भारी दबाव डाला गया है।' 

हाफिज की दहशतगर्दी का अंदाजा ऐसे लगा सकते हैं कि उस पर अमेरिका ने 10 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है। लेकिन आप यह जानकार हैरान हो सकते हैं कि हाफिज की गिरफ्तारी में कही भी मुंबई हमले का जिक्र नहीं किया गया है।

वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को दूसरा झटका तब लगा जब हेंग की इंटरनेशल कोर्ट ने पाकिस्तानी अदालत के फैसले पर रोक जारी रखते हुए फैसने पर समीक्षा कहने की बात कहीं। कोर्ट ने साफ किया कि कुलभूषण के मामले में पाकिस्तान ने वियाना संधि का उलंघन किया है।

इंटरनेशनल कोर्ट ने माना कि पाकिस्तानी जेल में बंद कुलभुषण को काउंसलर एक्सेस नहीं देना पाकिस्तान की गलती है, यह उसका अधिकार है, जो मिलना चाहिए। जाधव को काउंसलर एक्सेस देना भारत और जाधव दोनों की बड़ी जीत है, क्योंकि इससे पहले भारत ने पाकिस्तान से 13 बार काउंसलर एक्सेस की गुजारिश की थी, लेकिन हर बार पाकिस्तान ने इसे खारिज किया। ऐसा कर पाकिस्तान ने वियना संधि के आर्टिकल 36 का उल्लंघन किया।

इंटरनेशल कोर्ट का ये फैसला 15-1 से आया है, यानी पैनल में शामिल 15 सदस्यों को भारत की बात पसंद आई, जबकि एक पाकिस्तान से तालुक रखने वाले साहेब को पसंद नई आई। कोर्ट के इस फैसले पर देश-दुनिया कई दिग्गज नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है।

कोर्ट के फैसले पर पीएम मोदी ने ट्वीट किया, हम आईसीजे के आदेश का स्वागत करते हैं, सत्य और न्याय की जीत हुई है। हमारी सरकार हर भारतीय की सुरक्षा और कल्याण के लिए हमेशा काम करेगी। वहीं पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी आईसीजे के आदेश का स्वागत करते हुए इसे भारत के लिए बड़ी जीत करार दिया।

वहीं पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, मैं आईसीजे के निर्णय का स्वागत करता हूं। पाकिस्तान की जेल की कोठरी में अकेले मौजूद कुलभूषण जाधव और मुश्किल समय का सामना कर रहे उनके परिवार के प्रति मेरी सहानुभूति है।'' 'यह निर्णय परिवार के लिए राहत एवं खुशी का क्षण लाया है तथा फिर उम्मीद जगी है कि जाधव एक दिन आजाद होंगे और भारत लौटेंगे।''

बता दें कि कुलभुषण पर आए कोर्ट के फैसले के बाद अब उनकी रिहाई की मांग भी तेज हो रही है, लेकिन कोर्ट के फैसले पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से साफ किया है कि, हम कमांडर कुलभूषण जाधव को बरी और रिहा नहीं करेंगे व भारत वापस नहीं भेजने के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले की सराहना करते हैं। वो पाकिस्तान के लोगों के खिलाफ किए गए अपराध के लिए दोषी हैं। पाकिस्तान मामले में कानून के मुताबिक आगे बढ़ेगा।

यानी साफ शब्दों में कहें तो इंटरनेशनल कोर्ट से लाताड़ लगाने के बाद भी पाकिस्तान के दोगले चरित्र में कोई बदलाव की उम्मीद नहीं दिख रही है। लेकिन जाधव को काउंसलर देने का आदेश देना भारत के खिलाफ पाकिस्तान की बड़ी हार है, जिसे पाकिस्तन नजरअंदाज करने की कोशिश कर रहा है। 

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