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पाकिस्तान को हुआ डायबिटीज, किया मिठाई से परहेज

नोएडा : जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मर जाता है, ऐसा लगता है, स्वतन्त्रता से पहले एक विद्रोही कवि के रूप में ख्याति प्राप्त करने वाले दिनकर ने ये शब्द पाकिस्तान के लिए ही गढ़े थे, क्योंकि भारत के खिलाफ कई बार मुंह की खानी के बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। दुश्मन के शक्ल में पनप रहे पड़ोसी पाकिस्तान को भारत ने कई बार शांति का पहाड़ा पढ़ाया लेकिन आदत से लाचार पाकिस्तान न तो तब माना न अब मान रहा। पाकिस्तान ने हर बार भारत की शांति का कत्ल किया, भारत की पहल के पीठ में छुरा घोंपा। और अब आजादी के जश्न में भी पाकिस्तान भारत का शांति ऑफर ठुकरा कर अशांति पर आमादा है।

अब तक ऐसी परंपरा रही है कि जब भी कोई बड़ा त्योहार होता है तो दोनों देशों की ओर से आपस में मिठाइयां बांटी जाती हैं। लेकिन इस बार अटारी-वाघा बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल और पाकिस्तानी रेंजरों ने एक-दूसरे को मिठाई नहीं दी। और इसकी बड़ी वजह है जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार का वो ऐतिहासिक फैसला जिसका इंतजार सात दशक से था।

जम्मू-कश्मीर की विकास यात्रा को बाधित कर रही धारा 370 का इतिहास अतीत किए जाने के फैसले से बौखलाए पाकिस्तान की खलबलाहट का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि कि ईद-उल-अजहा के बाद अब स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी पाकिस्तान ने भारत की पहल को ठेंगा दिखा दिया। दोनों देशों के बीच तल्खियां इतनी बढ़ गई है कि भारत का छोटा भाई पाकिस्तान न तो भारत को मिठाई दे रहा है और न बड़े भाई के हाथों मिठाई का आशिर्वाद लेने को राजी है।

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