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कहीं तिब्बत की तरह चीन की नजर मालदीव पर तो नहीं!

माले: मालदीव में जारी आपातकाल और लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन पर मालदीव के निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने चीन को करारा जवाब दिया है। नशीद ने भारत से इस मामले में दखल देने की बाद कही थी, जिसपर चीन ने भारत को चेतावनी जारी करते हुए दुसरे के मुद्दे से अलग रहने की सलाह दे डाली थी। चीन का इस तरह भारत को चेतावनी देना किसी के गले नहीं उतर रहा है, चीन मालदीव पर बुरी नजर पहले से ही बनाये हुए है। ऐसे में चीन की मंशा कुछ ठीक नहीं लग रही है।

बतादें कि जहाँ मालदीव में राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने देश के विपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के जजों को गिरफ्तार करवाकर आपातकाल लागू कर दिया है। वहीँ इस मामले को लेकर भारत और चीन में भी तनातनी बननी शुरू हो गयी है। कारण यह है है मालदीव के पूर्व और निर्वासित राष्ट्रपति मोम्मद नशीद ने भारत से अपील की है कि वह देश में सैन्य हस्तक्षेप कर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करे। इसके लिए भारत ने अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है। लेकिन भारत को चीन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि वह इस मामले से दूर रहे, चीन को चिंता है कि भारत मालदीव में सेना के बहाने अपना अधिकार मजबूर  कर सकता है।

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चीन की इस बात पर देश के निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने चीन को कड़ा जवाब दिया है। नशीद ने कहा कि उनके देशवासी भारत से सकारात्मक भूमिका की उम्मीद करते हैं। नशीद ने कहा कि 1988 में संकट के समय भारत ने देश की मदद की थी, नशीद का यह बयान चीन की ओर से भारत को मालदीव के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देने की चेतावनी जारी करने को लेकर आया है। मालदीवमें जारी संकट पर पूरी दुनिया भारत में मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामिल की आलोचना हो रही है।

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वही यामिन को चीन का करीबी माना जाता है, आरोप तो यहाँ तक है कि चीन की नजर मालदीव पर बनी हुई है। मालदीव के राष्ट्रपति चीन के इशारे पर काम कर रहे हैं। जिसके कारण ही चीन ने भारत के सैन्य विकल्प के मुद्दे पर चेतावनी जारी करते हुए कहा कि अगर भारत मालदीव में कोई दखल देता है तो स्थित जटिल हो जायेगी।      

 

 

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