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लंद कोर्ट से माल्या को मिली गुड न्यूज, मोदी टेंसन बढ़ी

लंदन: विजय माल्या! नाम तो सुना ही होगा, नाम सुना है तो पहचान छिपी नहीं होगी! एक समय में नाम और सोहरत के मामले में अच्छे-अच्छो की नाम में दम करने वाला विजय माल्या, इन दिनों भारत सरकार की सिरदर्दी का कारण बना है। ऐसी उम्मीद थी कि माल्या नाम के इस टेंसन से जल्द मुक्ति मिलेगी, लेकिन लंगन की कोर्ट ने ऐसा होने नहीं दिया।

भारत के अलग-अलग बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये लेकर फरार माल्या को भारत लाने के रास्ते में नाया रोड़ा निकल आया।  2016 से लगातार लंदन में डेरा जमाये माल्या को रॉयल कोर्ट्स ऑफ जस्टिस ने बड़ी राहत देते हुए प्रत्यर्पण आदेश के ख़िलाफ़ अपील करने की इजाजत दे दी। कोर्ट के इस आदेश का सीधा मतलब है कि माल्या मामले की अब पुन: सुनवाई होगी।

ब्रिटेन के गृह मंत्री साजिद जाविद ने माल्या के प्रत्यर्पण के आदेश दे दिए थे, लेकिन माल्या ने इस आदेश के खिलाफ अपील की, एक अपील ठुकराये जाने के बाद एक और अपील की, और अब की बार दुआ कबूल हो गई। दरअसल, माल्या ने पहले लिखित अपील की जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया, लेकिन माल्या की मौखिक अपील मंजूर कर ली गई है।

पहील अपली में माल्या ने पांच बिंदुओं को आधार बनाया। जिनमें निष्पक्ष ट्रायल, मीडिया ट्रायल और जेल की परिस्थितियों का हवाला दिया। लेकिन कोर्टने माल्या की एक नहीं सुनी। जिसके बाद माल्या की ओर से अपने खिलाफ प्रथम दृष्टया केस बनाने के लिए जो सबूत दिए गए हैं, उसी के मद्देनजर कोर्टा का कलेजा पसीज गया।

मामले की सुनवाई के दौरान माल्या की वकील क्लेयर मोंटगोमेरी ने कोर्ट से कहा कि सीबीआई अधिकारी अस्थाना गवाहों को धमकी दे रहे हैं कि अगर उन्होंने माल्या के खिलाफ आरोप नहीं लगाए तो उन पर भी तोहमत जड़ दिए जाएंगे। अपना बचाव करते हुए माल्या ने कोर्ट से कहा कि उनके खिलाफ राजनीतिक कारणों से मामला बनाया जा रहा है। माल्या की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें भारत की सभी आर्थिक मुसीबतों का पर्याय बना दिया गया है।

आपको बता दें कि माल्या के प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील करने की इजाजत देना भारत सरकार के लिए 440 वोल्ट के झटके के समान है, क्योंकि भारत सरकार माल्या के सारे पापों का पन्ना तैयार कर रखे है, लेकिन हिसाब किताब के लिए अभी और इंतजार करना होगा। 

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