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बड़ी खबर : भारत बना संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का अहम सदस्य, जानिए क्या है फायदे

सं.रा. भारत एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र परिषद का अहम सदस्य बना। जिससे अब भारत फिर संयुक्त राष्ट्र में अपना दबदबा कायम कर सकेगा। आपको बता दे कि इससे पहले भी भारत दो बार संयुक्त राष्ट्र परिषद का सदस्य रह चुका है। जिसमें भारत 2011-2014 और 2014-2017 के लिए निर्वाचित हुआ था। बता दे कि भारत का पिछला कार्यकाल 31 दिसंबर 2017 को पूरा हुआ था। अगर हम नियम की बात करे तो कोई भी देश लगातार दो कार्यकाल के बाद तुरंत तीसरी बार चुनाव नहीं लड़ सकता है।

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गौरतलब है कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च मानवाधिकार इकाई संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) का चुनाव बहुमत के साथ जीत लिया है। इसका कार्यकाल तीन साल के लिए होगा जो 1 जनवरी 2019 से शुरू होगा। एशिया पसिफिक क्षेत्र कैटिगरी में भारत को 188 वोट मिले हैं, जो कि सभी कैंडिडेट्स में सबसे अधिक है

भारत ने एशिया-पसिफिक क्षेत्र में अपनी सीट पक्की की है। वहीं इसकैटिगरी में भारत के अलावा बहरीन, बांग्लादेश, फिजी और फिलिपींस भी चुनाव में अपना हाथ आजमा रहे थे। वोटिंग में इन पांच देशों में भारत को सबसे ज्यादा 188 वोट मिले। चूंकि पांच सीटों के लिए पांच देश चुनाव लड़ रहे थे, ऐसे में भारत का चुनाव जीतना तय माना जा रहा था।

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद् (UNHRC) के सदस्य बनने के फायदे

आपने यह देखा होगा कि भारत हमेशा न्याय के साथ खड़ा रहा है, भले ही इसपर कितने भी दबाव क्यों न बनाया गया हो। यू.एन के सदस्य बनने के बाद भारत सामाजिक मुद्दे एवं इससे संबंधित विभिन्न मुद्दे जैसे सार्वभौमिकरण, निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता एवं सृजनात्मक अंतर्राष्ट्रीय संवाद को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर रखेगा। जिससे एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की तूती बोली जाएगी।  

संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानव अधिकार आयोग की स्थापना वर्ष 1946-47 में आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् की एक कार्यात्मक समिति के रूप में की थी, जिसका मुख्य कार्य-प्रतिवेदन तैयार करना, अधिकारों के अंतर्राष्ट्रीय बिल, नागरिक स्वतंत्रता, स्त्री दशा एवं मानवाधिकार सम्बन्धी विषयों पर अपनी अनुशंसाएं प्रकट करना है।

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