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आतंकवाद पर मोदी और इमराम एक ही भाषा बोल रहे हैं, लेकिन दोनों में है एक बड़ा अंतर!

नई दिल्ली: आतंकवाद के मसले पर भारत-पाकिस्तान के बीच तनातनी जगजाहिर है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में भारतीय सुरक्षाबलों पर पाकिस्तानी आतंकी संगठन द्वारा किए गए भीषण हमले के बाद दोनों के बीच पहले से जारी तकरार और भी बढ़ी है। जम्मू-कश्मीर में भारत-पाकिस्तान सीमा पर अब भी तनाव बरकरार है।

वहीं दूसरी तरफ भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों के प्रधानमंत्री अपनी-अपनी पीठ थपथपाते हुए पूर्व की सरकारों को जिम्मेदार बता रहे हैं। गौर हो कि पाकिस्तान द्वारा आतंकियों के मदद किए जाने की बात पर बीते दिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान नें सिंध में एक सभा को संबोधित करते हुए कबूल किया कि अगर पहले की सरकारों ने आतंकवाद और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की होती तो आज स्थिति अलग होती।

इमरान खान की बातों से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान सरकार आतंकियों की मदद करती रही है। हालांकि पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री दावा कर रहे हैं कि हम आतंकियों के खिलाफ कार्रवाईओ कर रहे हैं।

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वहीं शनिवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विरोधी दलों पर हमला करते हुए कहा कि, अगर पूर्व की सरकारों ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की होती तो आज की स्थिति कुछ और होती। पीएम ने ग्रेटर नोएडा में कहा कि, अगर पूर्व की सरकार ने आतंक के खिलाफ कार्रवाई की होती तो आज आतंक नासूर न बनता।

उन्होंने कहा कि, 2016 में पहली बार हमारी सरकार ने आतंक के आकाओं को उसी के भाषा में जवाब दिया। विरोधियों पर हमला बोलते हुए पीएम ने कहा कि, उरी के बाद हमने सर्जिकल स्ट्राइक किया तो ये लोग सबूत मांग रहे थे। अब पुलवामा हमला हुआ। भारत के वीरों ने जो काम किया, वैसा काम दशकों तक नहीं हुआ है। हमारे वीरों ने आतंकियों को घर में घुसकर मारा है।

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उन्होंने कहा कि, आतंकियों को भारत से ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी। पीएम ने कहा कि, देश के दुश्मनों में भारत के प्रति जो सोच बनी थी, उसका कारण 2014 के पहले की सरकारों का रैवया था। 26/11 की घटना को भुलाया नहीं जा सकता। उस वक्त आतंक के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया। उस समय सेना का खून गरम था, लेकिन दिल्ली ठंडे बस्ते में थी। यहीं वजह थी कि मुंबई हमले के बाद भी देश में कई बार धमाके हुए। पहले की सरकार ने नीतियां नहीं बदली, सिर्फ गृह मंत्री बदले।

आपको बता दें कि हाल के दिनों में आतंकवाद को लेकर भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री दोनों एक ही सूर में बात कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी दोनों के बीच एक बड़ा अंतर है कि इमरान खान आतंकियों की मदद करने के लिए विपक्ष को कोस रहे हैं, जबकि पीएम मोदी आतंकियों के खिलाफ प्रयाप्त कार्रवाई न करने के लिए विरोधियों को कोस रहे हैं।

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