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अमेरिका का घमंड तोड़ने के लिए एकजुट हुए 16 बड़े देश, भारत भी है शामिल

मेलबर्नः अमेरिका के सात्ता पर काबिज होने के बाद से ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने देशहित की बात करते हुए अक्सर बड़े फैसले लेते रहे हैं। लेकिन ट्रंप के कुछ फैसले ऐसे भी है, जिसने दुनिया के कई देशों को नाराज किया है, जिसके बाद अब ये सभी देश अमेरिका से अलग होकर मुक्त व्यापार समझौते की ओर बढ़ रहे हैं। इन देशों में एक देश भारत भी है।

आपको बता दें की हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े कुछ ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच ट्रेड वार की स्थिती दिख रही है। इन सभी मामलों को बीच खबर है कि भारत और जापान समेत दुनिया के 16 देश इस साल के अंत तक एक बड़ा कारोबारी गुट बना सकते हैं। अब तक की मिली जानकारी के अनुसार इस गुट में अमेरिका का नाम नहीं है।

खासकर अमेरिका के संरक्षणवाद की नीति से निपटने के लिए बनाई जा रही इस गुट में भारत और जपान के अलावा  चीन, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ अन्य देशों के नाम शामिल हैं। आपको बता दें कि ऐसा सिर्फ विचार ही नही किया जा रहा बल्कि इस पर अमल भी किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को एशियाई देशों के वाणिज्य मंत्रियों ने इस दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है।

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खबरों के अनुसार इन 16 देशों के बीच अगले कुछ महीनों में मुक्त व्यापार समझौते पर आपसी सहमति बनाई जा सकती हैं। इस संबंध में जापान के टोक्यों में रीजनल कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनामिक पार्टनरशिप यानी RECP के तहत बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें 16 देशों सदस्य शामिल हुए। बैठक के दौरान इन देशों में आपसी मतभेदों को खत्म करने की दिशा अहम विचार-विमर्स किया है।

जानकारी के अनुसार, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने कहा कि क्षेत्रीय व्यापार के समझौते पर जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंच जाएगा, ताकि अमरीकी संरक्षणवाद से अलग रहते हुए मुक्त और नियम आधारित कारोबार की ओर बढ़ा जा सके। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बैठक के बाद सिंगापुर के वाणिज्य मंत्री के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में जापानी वाणिज्य मंत्री हिरोशिगे सेको ने कहा कि समझौते का रास्ता साफ हो चुका है।

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उन्होने कहा कि अमेरिकी संरक्षणवाद के असर को कम करने के लिए, एशियाई देशों के लिए मुक्त व्यापार के रास्ते पर चलना जरूर है। उन्होंने कहा कि इस गुट में शामिव 16 देश दुनिया की एक तिहाई अर्थव्यवस्था और करीब आधी आबादी को अपने दायरे में रखेंगे, जिसके लिए सभी देशों के मतवेद दूर किए जा रहे हैं।

वहीं उन्होंने भारत के मतवेद को लेकर कहा कि इसमें भारत की मांग भी शामिल है, जिसमें वह चाहता है कि वस्तु एवं सेवाओं पर टैरिफ घटाने के किसी भी अनुबंध में लोगों को बिना किसी बाधा के आवाजाही की इजाजत हो। बताया जाता है कि भारत अपने उच्च कुशल आईटी क्षेत्र के लोगों के लिए मुक्त आवाजाही चाहता है, जो इस बैठक के अहम मुद्दों में से एक हैं।

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