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पूरी दुनिया में हो रही है गूगल की रर्चा- कंपनी से बाहर हुआ कर्मचारी

नई दिल्ली: इंटरनेट की दुनिया के बेताज बादशाह गूगल अपनी 'पॉलिसी' को लेकर विवादों में घिरा है। दरअसल इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुए जब काम करने के तौर तरीके और समानता के मशहूर गूगल के एक कर्मचारी ने कंपनी पर कर्मचारियों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए एक लेख लिख दिया।

दरअसल, गूगल के इंजीनियर जेम्स डामोरे ने एक इंटरनल मेमो लिखा था, जिसमें कंपनी के भीतर भेदभाव किए जाने का खुलासा किया गया था। यह लेख तेजी से कर्मचारियों के बीच सर्कुलेट होने लगा, जिसके बाद कंपनी ने कर्मचारी को बाहर का रास्ता दिखा दिया और इसके बाद वह लेख सार्वजनिक हो गया।

इसके बाद तो मानो पूरी दुनिया में बस इसकी ही चर्चा होने लगी और देखते ही देखते यह मामला सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। इस मसले पर सिलिकॉन वैली में एक नई तरह की बहस छिड़ गई। मीडिया रिपोर्ट में कर्मचारी ने अपने लेख में महिलाओं को लेकर लिखा था कि महिलाएं टेक कंपनियों के लिए लीडर्शिप रोल में फिट नहीं बैठती हैं।

बताया जा रहा है कि कर्मचारी ने इस दस्तावेज की हेडिंग गूगल आईडियोलॉजिकल इको चैंबर दिया था, जिसमें उन्होंन लिखा कि टेक कंपनी में महिलाएं अच्छे पदों पर सिर्फ इसलिए नहीं हैं, क्योंकि उनके साथ भेदभाव होता है, बल्कि यहां महिलाएं पुरुषों की बराबरी नहीं कर सकती हैं।

मामले पर कर्मचारी का कहना है कि गूगल ने जेंडर पक्षपात को बरकरार रखने के लिए उन्हें नौकरी से निकाला है, जबकि इस पूरे मामले को लेकर गूगल के सीईओ सुंदर पिच्चई ने कहा कि डामोरे ने कंपनी के कोड एंड कन्डेक्ट का उल्लंघन किया है। बता दें कि एक रिपोर्ट मे ऐसा भी दावा किया गया है कि  गूगल में 69 फीसदी पुरुष और 2 फीसदी ही अफ्रीकन अमेरिकन महिलाएं काम करती हैं, महिलाएं 20 फीसदी टेक्नीकल जॉब में ही हैं।

 

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