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चीन-श्रीलंका: हंबनटोटा बंदरगाह हुए हस्ताक्षर, लाखों लोग होंगे प्रभावित

कोलंबो: कड़े विरोध के करीब एक माह बाद श्री लंकाई सरकार ने चीन के साथ हंबनटोटा बद्र्गाह विकसित करने के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। श्रीलंका के तट पर चीन अरबों रूपये की लागत से बंदरगाह बना रहा है। चीन द्वारा इस बंदरगाह का निर्माण भारत को घेरने के उद्देश्य से किया जा रहा है।   

बतादें कि भारत और श्रीलंकिया जनता के कड़े विरोध के बाद श्रीलंका ई सरकार ने हंबनटोटा बंदरगाह को को विकसित करने के लिए शनिवार को चीन के साथ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। चीन ने दक्षिणी हंबनटोटा बंदरगाह 1.1 अरब में किराए लिया है। बंदरगाह के निर्माण को लेकर भारत के साथ साथ श्रीलंका के नागरिकों ने भी विरोध किया था। जिसके बाद सुधार कर श्रीलंका की सरकार ने शनिवार को यह कदम हस्ताक्षर किये हैं।

हंबनटोटा बंदरगाह हिंद महासागर में चीन के 'वन बेल्ट वन रोड' पहल में प्रमुख भूमिका निभाएगा। वहीँ पहले चीन इस बंदरगाह का उपयोग अपनी सैन्य जरूरतों के लिए भी करने वाला था, लेकिन भारत के कड़े विरोध के बाद श्रीलंका ने यह फैसला बदल दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार संशोधित समझौते पर प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के अधीन पोर्ट और शिपिंग मंत्रालय के अंतर्गत आनेवाले श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी (एसएलपीए) और चायना मर्चेन्ट्स पोर्ट होल्जिंग्स के बीच हस्ताक्षर किए गए।

इस समझौते के तहत श्रीलंका की सरकार ने हंबनटोटा बंदरगाह और उसके पास की 15,000 एकड़ जमीन को 99 सालों के लिए चीन को किराए पर दे दिया गया है। वहीँ  इस समझौते के चलते लाखों लोगों बेघर होना पड़ सकता है। जिस जमीन को किराए पर सरकार ने दिया है, उस पर अभी हजारों गाँव बसे हुए हैं। वहीँ सरकार की ओर से कहा गया है कि जिन लोगों की जमीन जायेगी उन्हें सरकार की ओर से दूसरी जगह जमीन उपलब्ध करवाई जायेगी।    

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