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हिमाचल: अब नहीं आएगा 'जल संकट', वैज्ञानिक पिघलाएंगे बर्फ की चोटियां

शिमला: हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में पानी की किल्लत से लोगों को जूझना पड़ा है। हिमाचल प्रदेश में विगत माह ही पानी का सबसे बड़ा अकाल पड़ा था। राजधानी शिमला में  पानी की किल्लत से सरकारी काम-काज भी बंद हो गया है। ऐसे में विज्ञान विभाग ने पानी को नया प्रयोग शुरू किया है।

बतादें कि राज्य का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने ने डीआरडीओ के साथ मिलकर स्नो हार्वेस्टिंग (हिम दोहन) पर काम शुरू किया है। जिससे हिमाचल सहित कई राज्यों की पानी की किल्लत को खत्म किया जा सके। बताया जा रहा है कि विभाग ने इसपर प्रयोग भी शुरू कर दिया है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि अगर स्नो हार्वेस्टिंग का शोध सफल रहा तो हिमाचल के अलावा कई अन्य प्रदेशों की भी पानी की किल्लत खत्म हो जाएगी।

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दरअसल विज्ञान विभाग और एक केन्द्रीय एजेंसी मिलकर किन्नौर की ऊँची चोटियों पर जमी बर्फ का संरक्षण करने का प्रयोग कर रहे हैं। जिससे इसका पानी के संसक्त संकट के दौरान यूज किया जा सके। जानकारी में बताया गया है कि विज्ञान विभाग ने सरकार कि चोटी की बर्फ का संरक्षण कर, जरूरत के समय प्रयोग करने की सलाह दी। जिसके बाद सरकार ने इसे हरी झंडी दे दी। अब विभाग ऊंचाई वाले स्थानों पर जमी बर्फ को पिघलने से बचाने पर काम कर रहा है।

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जिससे गर्मी में जल संकट के दौरान इसे पिघलाकर इसका प्रयोग किया जा सके। हालाँकि अभी प्रोजेक्ट को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं दी गयी है, लेकिन फिर भी बताया गया है कि प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और अभी तक का नतीजा पॉजिटिव रहा है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि प्रयोग सफल रहने के बाद हिमाचल सहित, कई अन्य राज्यों की भी पानी कि किल्लत को दूर किया जा सकेगा।   

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