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एक क्लिक में जाने- स्वामी विवेकानंद की सबसे खास बात!

नई दिल्ली: शिकागो में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण की 125वीं वर्षगांठ और दीनदयाल उपाध्याय के जन्मशती समारोह के तहत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज छात्रों के एक सम्मेलन को संबोधित किया। दिल्ली के विज्ञानभवन में आयोजिक समारोह के दौरान पीएम ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अपने अल्प जीवन में ही विश्व में अपनी छाप छोड़ दिया था।

पीएम ने कहा कि तब विश्व को पता नहीं था कि Ladies and Gentleman के अलावा भी कुछ हो सकता है, लेकिन जब विवेकानंद ने brothers  and sisters कहा तो मिनटों तक तालियां बजती ही रही। इसके बाद दुनिया को भारत की ताकत का एहसास हुआ। मोदी ने कहा कि जिस वक्त पूजा-पाठ का महत्व ज्यादा था, उस समय 30 साल के नौजवान ने कहा था कि मंदिर में बैठने से भगवान नहीं मिलेंगे, जन-सेवा से मिलेंगे। वो नौजवान स्वामी विवेकानंद ही थे, आइए जानते हैं विवेकानंद के बारे में कुछ खास जानकारियां।

स्वामी विवेकानंद?

वह वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे, विवेकानंद का वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में साल 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। जो पूरी दुनिया के लिए ऐतिहासिक दिन था और इस दिन विवेकानंद का संबोधन ऐतिहासिक संबोधन के तौर पर जाना गया।

शिकागो में विवेकानंद के संबोधन की 125वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी का लाजवाब भाषण

भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुंचा था। भारत में विवेकानंद को एक देशभक्त संत के रूप में माना जाता है और इनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

स्वामी विवेकानन्द ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे, उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुआत मेरे अमरीकी भाइयो और बहनों के साथ करने के लिये जाना जाता है। उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था और सभा में काफी देर तक तालियों की आवाज सुनी जा सकती थी।

स्वामी के अनमोल वचन

उठो, जागो और तब तक रुको नहीं जब तक मंज़िल प्राप्त न हो जाये

तुम अपनी अंत:स्थ आत्मा को छोड़ किसी और के सामने सिर मत झुकाओ

जब तक तुम यह अनुभव नहीं करते कि तुम स्वयं देवों के देव हो, तब तक तुम मुक्त नहीं हो

मानव– देह ही सर्वश्रेष्ठ देह है, एवं मनुष्य ही सर्वोच्च प्राणी है

मैं चाहता हूँ कि मेरे सब बच्चे, मैं जितना उन्नत बन सकता था, उससे सौगुना उन्न्त बनें

तुम लोगों में से प्रत्येक को महान शक्तिशाली बनना होगा

मैं कहता हूँ, अवश्य बनना होगा

आज्ञा-पालन, ध्येय के प्रति अनुराग तथा ध्येय को कार्यरूप में परिणत करने के लिए सदा प्रस्तुत रहन

इन तीनों के रहने पर कोई भी तुम्हे अपने मार्ग से विचलित नहीं कर सकता

यदि तुम स्वयं ही नेता के रूप में खडे हो जाओगे, तो तुम्हे सहायता देने के लिए कोई भी आगे न बढेगा

यदि सफल होना चाहते हो, तो पहले ‘अहं’ ही नाश करो

यहां सुनिए विवेकानंद पर पीएम मोदी ने क्या कहा- मोदी का ऐतिहासिक भाषण!

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