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कथित गुजरात मॉडल: देखकर रोंगटे न खड़े हो जाए तो कहना...

गांधीनगर: गुजरात का विकास दुनियाभर में घूम कर फिर वहीँ आ गया है और आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी में उतर चुका है. दूसरी ओर में कुछ मीडिया घराने चमचमाती सड़कों पर हवा में उड़ती साहेब की गाड़ियों को दिखाकर जनता का ऐसा ब्रेनवाश करेंगे कि इस तरह के दहलाने वाली हकीकत से लोग मरहूम हो जाएँ।

Source ANI

आपने सोशल मीडिया, और देश कुछ एक मीडिया सहित पीएम नरेंद्र मोदी के कथित गुजरात मॉडल का डंका पीटते तो जरुर ही सुना होगा, तो आज उसी गुजरात मॉडल का एक जीता जागता नमूना पेश किया जा रहा है। जिसे पढ़कर आपका दिगाम 'नोकिया के पुराने सेट' की तरह भन्ना जाए तो हमे दोष मत दीजिएगा।

Source ANI

क्योंकि हमे खुद ही इस तरह के कथित विकास का अभी अभी पता चला है। अब इसे गुजरात मॉडल, पार्ट वन-टू-थ्री-फोर कुछ भी कह लो। जहाँ मासूम बच्चे दिनों ही महीनों से एक गहरे नाले को पार करने के लिए अपनी जान जोखिम में हर रोज डालते हैं। दरअसल एक न्यूज़ एजेंसी द्वारा जारी किये गये एक विडिओ में आप देख सकते हैं कि कुछ मासूम बच्चे दो से तीन बड़े लोगों के साथ किस प्रकार से नाले को पार कर रहे हैं।

यह रहा वीडियो    

यह विडिओ उसी गुजरात का है जहाँ का विकास दुनियाभर में घूम रहा है। खुद पीएम नरेंद्र मोदी दुनियाभर में विकास का ढोल बजाते फिरते हैं। यह रोंगटे खड़े कर देने वाला विडियो गुजरात के खेड़ा जिले के नाएका और भेरई गांव को जोड़ने वाले पुल का है। जहाँ आप देख सकते हैं कि बच्चे जान जोखिम में डाल कर पुल को पार कर रहे हैं। जोकि पुल महीनों पहले टूट गया था, जिसके बाद से साहेब का विकास वहां कभी घूमने ही नहीं गया और न ही इस पुल की मरम्मत हुई।

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जिसके चलते स्कूली बच्चे एक जंग सी लड़कर स्कूल जाते हैं. आप खुद ही देख सकते हैं कि कि किस प्रकार स्कूली बच्चे अपने पैरंट्स और स्थानीय लोगों की मदद से नाला पार कर रहे हैं। यहाँ जरा सी चूक का मतलब बड़ा हादसा होना। छात्र की नहीं बिना सवारी वाले सभी लोगों को इसी तरह के विकास से होकर गुजरना पड़ता है। स्थानीय लोगों के हवाले से एजेंसी ने बताया है कि, पुल महीनों से टूटा पड़ा है जिससे आने जाने वालों लोगों को इसी प्रकार निकलना होता है, खासकर बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। वहीँ अगर इस प्रकार से न निकला जाए तो यहाँ से दस किलोमीटर दूर दुसरे मार्ग से जाना होगा। प्रशासन से कई बार मांग  की गयी कि पुल बनवाया जाए। लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। सवाल यह भी है कि बुलेट ट्रेन चलाने का दम भरने वाले कथित विकासधारी पुरुष पुल का निर्माण नहीं करवा सकते हैं, जबकि केंद्र और राज्य दोनों जगह उनकी ही सरकार है। 

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